Reported By: Vijendra Pandey
,जबलपुरः Lenskart Bindi-Hijab Row: आईवियर रिटेलर लेंसकार्ट की ओर से जारी ड्रेस कोड को लेकर इन दिनों जमकर विवाद हो रहा है। लेंसकार्ट ने बिंदी-तिलक की मनाही के बाद हिजाब पहनने की परमिशन दे दी थी। विवाद बढ़ा तो अब लेंसकार्ट ने सफाई दी है। इस मसले को लेकर अब देशभर में बवाल हो रहा है। जबलपुर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता मदन महल स्थित लेंसकार्ट शोरूम पहुंचे और अपना विरोध जताया। इस दौरान सुरक्षा को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के कर्मचारियों के माथे पर भगवा तिलक लगाया। इसके साथ ही उनकी कलाई पर कलावा भी बांधा। कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के मालिक को माफी मांगने की बात कही। साथ ही चेतावनी भी दी कि 2 दिन में माफी ना मांगने पर लेंसकार्ट के सभी शोरूम की तालाबंदी की जाएगी और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
Lenskart Bindi-Hijab Row: विवाद लेंसकार्ट का ड्रेस कोड था।इसमें तिलक, कलावा, बिंदी नहीं लगाने की बात कही गई थी। शादीशुदा हिंदू महिलाओं के लिए कहा गया था कि अगर सिंदूर लगाया जा रहा है, तो उसे बहुत कम मात्रा में लगाना चाहिए। हालांकि हिजाब और पगड़ी की इजाजत दी गई थी। हिजाब-पगड़ी के मामले में भी कहा गया कि उसका रंग काला होना चाहिए। ऑनलाइन शेयर किए गए ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट में लिखा है कि हिजाब से छाती का मध्यम हिस्सा ढका होना चाहिए। लेकिन हिजाब ऐसा नहीं हो जिससे कंपनी का लोगो ढक जाए। साथ ही स्टोर में बिंदी लगाने पर पाबंदी की बात कही गई थी। हाथ में पहनने वाले कलावे का जिक्र करते हुए कहा गया कि धार्मिक धागे/रिस्टबैंड उतार देने चाहिए।
लेंसकार्ट ने एक्स हैंडल पर लिखा कि हमने आपकी बात सुनी है,स्पष्ट रूप से और खुले दिल से सुनी है।पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय और ग्राहकों ने अपनी राय रखी और हमने उसे ध्यान से सुना है।आज हम अपने इन‑स्टोर स्टाइल गाइड को एक समान रूप में लागू कर रहे हैं और उसे पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं।इन दिशानिर्देशों में हमारी टीम के सदस्यों की ओर से पहने जाने वाले हर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक जैसे बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब, पगड़ी आदि का स्पष्ट और बिना किसी भ्रम के स्वागत किया गया है।इन्हें किसी अपवाद की तरह नहीं, बल्कि हमारी पहचान के रूप में स्वीकार किया गया है। लेंसकार्ट ने आगे लिखा कि भारत में, भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाई गई कंपनी है। हमारे 2,400 से अधिक स्टोर ऐसे लोग चलाते हैं, जो अपनी आस्था, परंपराओं और पहचान के साथ रोज काम पर आते हैं।ऐसी किसी चीज को हम कभी किसी से दरवाजे पर छोड़ने को नहीं कहेंगे। अगर हमारे कार्यस्थल से जुड़ी किसी भी पिछली बातचीत या संदेश से किसी को ठेस पहुंची हो या किसी टीम सदस्य को यह महसूस हुआ हो कि उसकी आस्था का यहां स्वागत नहीं है, तो हमें इसके लिए गहरा खेद है।यह न लेंसकार्ट की पहचान है और न ही हम कभी ऐसे होंगे।
We have heard you. Clearly and openly. Over the past few days, our community and customers have spoken – and we have listened.
Today, we are standardizing our In-Store Style Guide and sharing it publicly and transparently: https://t.co/lC8KlLLUZm
These guidelines explicitly and…
— lenskart (@Lenskart_com) April 18, 2026
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