बेंगलुरु, पांच अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होराट्टी ने कहा है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें फोन करके पद से इस्तीफा देने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं से चर्चा करने के बाद फैसला करेंगे।
होराट्टी ने यह भी कहा कि परिषद के सभापति और विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव सदन का विशेषाधिकार होता है न कि किसी राजनीतिक पार्टी के आलाकमान का।
होराट्टी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान विधान परिषद के सभापति चुने गए थे।
यह घटनाक्रम सोमवार को कांग्रेस आलाकमान की ओर से मुख्यमंत्री शिवकुमार को भेजे गए उस पत्र के बाद सामने आया है, जिसमें राज्य विधान परिषद के सभापति पद के लिए सलीम अहमद और उपसभापति पद के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दी गई थी, साथ ही तीन अगस्त को शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची भी शामिल थी।
पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए जी एस पाटिल और उपाध्यक्ष पद के लिए ए एस पोन्नाना के नामों को भी मंजूरी दी थी।
होराट्टी ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने मुझे फोन किया और अनुरोध किया कि मैं इस्तीफा दे दूं और शर्मिंदगी से बचने में सहयोग करूं क्योंकि पार्टी ने (नए सभापति के लिए) नाम भेज दिया है… मैं इस बारे में विपक्ष के नेताओं से चर्चा करूंगा और फैसला करूंगा।’’
आठ बार विधान परिषद के सदस्य रहे होराट्टी का मौजूदा कार्यकाल जुलाई 2028 तक है।
होराट्टी ने कहा कि परिषद के सभापति और विधानसभा अध्यक्ष को सिर्फ सदन ही चुन सकता है न कि किसी पार्टी का आलाकमान। उन्होंने कहा, ‘‘संभवत: यह पहली बार है जब मैंने किसी पार्टी को विधान परिषद के सभापति का नाम घोषित करते देखा है। मुझे नहीं पता कि वे ऐसा कैसे कर रहे हैं। लोकतंत्र में यह ठीक नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सभापति को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाना होता है और इसके लिए 10 सदस्यों को 14 दिन पहले नोटिस देना होगा। सदन में चर्चा के आधार पर इस मामले पर फैसला किया जाएगा।’’
उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सदन का फैसला ही सर्वोपरि होता है।
होराट्टी ने कहा कि उन्हें हटाने का कोई आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 1956 के बाद से विधान परिषद के किसी भी सभापति को इस्तीफा नहीं देना पड़ा है और सभी ने अपना कार्यकाल पूरा किया है।
कर्नाटक विधान परिषद में 75 सदस्य हैं, जिसमें कांग्रेस के 38, भाजपा के 24, जद (एस) के छह, एक निर्दलीय सदस्य और एक सभापति हैं, जबकि पांच सीट खाली हैं।
भाषा सुरभि गोला
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