‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सरकार के खिलाफ अराजक डिजिटल मुहिम: आरएसएस संबद्ध पत्रिका में लेख

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सरकार के खिलाफ अराजक डिजिटल मुहिम: आरएसएस संबद्ध पत्रिका में लेख

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सरकार के खिलाफ अराजक डिजिटल मुहिम: आरएसएस संबद्ध पत्रिका में लेख
Modified Date: May 26, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध पत्रिका ‘ऑर्गेनाइजर’ में प्रकाशित दो लेखों में कहा गया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) एक ‘‘अराजक डिजिटल मुहिम’’ है और इसे विदेशों से ‘‘जेन जेड’’ को सरकार के खिलाफ भड़काने’’ के प्रयास में शुरू किया गया है।

सोशल मीडिया पर कटाक्ष के रूप में हाल ही में शुरू सीजेपी काफी चर्चा में रही है।

पत्रिका की वेबसाइट पर प्रकाशित ‘कॉकरोच सिंड्रोम: भारत-विरोधी तकनीकी कटाक्ष का नया चेहरा’ शीर्षक वाले एक लेख में दावा किया गया कि इस मुहिम का ‘‘असल मकसद’’ राष्ट्र-निर्माण के लिए जरूरी समर्पित और केंद्रित प्रयासों को कमजोर करना और उनकी जगह शिकायत तथा असंतोष की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

लेख के लेखक कृष्णकुमार कैमल ने कहा कि ‘‘तथाकथित कॉकरोच जनता पार्टी के डिजिटल उभार को कुछ मुफ्तखोरी-केंद्रित, वामपंथी झुकाव वाले राजनीतिक तंत्र द्वारा ‘जेन जेड’ के व्यंग्य के मास्टरस्ट्रोक के रूप में उत्साहपूर्वक सराहा जा रहा है।’’

‘जेन जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि ‘‘उनके तथाकथित पांच लक्ष्यों की गंभीर और बारीकी से जांच करने पर संस्थागत पतन का एक भयावह खाका सामने आता है, जिसे युवा डिजिटल विद्रोह के रूप में पेश किया जा रहा है।’’

‘कॉकरोच जनता पार्टी: सरकार के खिलाफ जेन जेड को भड़काने का प्रयास’ शीर्षक वाले एक अन्य लेख में कहा गया है, ‘‘अमेरिका में रहने वाले आम आदमी पार्टी के एक सदस्य ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक इंस्टाग्राम पेज बनाया और युवाओं से बड़े-बड़े वादे किए, जो स्पष्ट रूप से भाजपा विरोधी अभियान का संकेत देते हैं।’’

इस लेख के लेखक डॉ. पंकज जगन्नाथ जायसवाल ने कहा, ‘‘कम समय में ही इस पेज ने पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्किये, अमेरिका और अन्य देशों से लाखों फॉलोअर्स जुटा लिए। इसका उद्देश्य युवाओं को दिग्भ्रमित कर सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।’’

कैमल ने अपने लेख में उल्लेख किया कि सीजेपी के वादों में सबसे खतरनाक वादा अदाणी समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाले मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ कुछ ‘‘खास पत्रकारों’’ के बैंक खातों की जांच करने की मांग है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह स्टालिनवादी कम्युनिस्ट सेंसरशिप का एक स्पष्ट उदाहरण है। यह घरेलू पूंजी पर एक क्रूर, लक्षित हमला है, जिसका उद्देश्य उन सभी मंच को चुप कराना है जो उनके अराजक वामपंथी विश्वदृष्टिकोण से मेल नहीं खाते।’’

लेख के लेखक ने कहा कि मतदाता का नाम हटाए जाने की स्थिति में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार करने की सीजेपी की मांग ‘‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पंगु बनाने के लिए रची गई एक हिंसक धमकी’’ है।

कैमल ने कहा, ‘‘संसदीय संख्या, चुनावी जनादेश और योग्यता के आधार पर मिलने वाली वास्तविकताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए, कैबिनेट पदों में महिलाओं के लिए मनमाने ढंग से 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करना, संवैधानिक शासन के प्रति पूर्ण और भयावह अज्ञानता को दर्शाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस मुहिम का असल मकसद राष्ट्र-निर्माण के लिए जरूरी समर्पित और केंद्रित प्रयासों को कमजोर करना और उनकी जगह शिकायत तथा असंतोष की संस्कृति को बढ़ावा देना है।’’

भाषा आशीष माधव

माधव


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