प्रयागराज, एक सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोडीन युक्त कफ सिरप के कथित अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े मामलों में मंगलवार को 19 कथित आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
वहीं, अदालत ने उन ट्रक चालकों, सहायकों और छोटे व्यापारियों की जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं, जो महज सीलबंद पार्सल का परिवहन कर रहे थे या इस बात से अनजान थे कि बक्सों में कफ सिरप छिपाकर रखे गये थे।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने एक साथ 78 जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वैध चिकित्सीय उद्देश्य के लिए कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल किए जाने पर यह स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के दायरे में नहीं आएगा।
अदालत ने कहा कि अगर ऐसे सिरप का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है या उसका अवैध रूप से भंडारण अथवा बिक्री की जाती है तो यह एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध होगा, चाहे यह काम लाइसेंस की आड़ में किया जाए या बिना लाइसेंस के।
अदालत ने कहा कि अगर कोई दवा विक्रेता या लाइसेंसधारी निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन युक्त सिरप का कानूनी रूप से परिवहन या बिक्री करता है तो उसे मादक पदार्थ नहीं माना जाएगा और उस पर एनडीपीएस अधिनियम लागू नहीं होगा।
अदालत ने शैली ट्रेडर्स के भोला प्रसाद, डीएसए फार्मा के दिवेश जायसवाल, महाकाल मेडिकल के अंकुश सिंह, अभिनव कुमार यादव, बादल आर्य और हर्ष अग्रवाल समेत आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
इन आरोपियों पर फर्जी फर्में बनाने और करोड़ों रुपये के फर्जी ई-वे बिल तैयार कर कफ सिरप की लाखों बोतलें नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल के लिए खुले बाजार, अन्य राज्यों और विदेशों में भेजने के आरोप हैं।
हालांकि, अदालत ने कई ट्रक चालकों और सहायकों को जमानत दे दी, जो केवल सीलबंद पार्सल का परिवहन कर रहे थे या इस बात से अनजान थे कि बक्सों में कफ सिरप छिपाकर रखे गये थे।
भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र
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