कॉजपा के संसद मार्च के प्रयास ने दिल्ली के प्रमुख जन आंदोलनों की याद दिलाई

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कॉजपा के संसद मार्च के प्रयास ने दिल्ली के प्रमुख जन आंदोलनों की याद दिलाई

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 05:18 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 05:18 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के समर्थकों ने सोमवार को संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जिसके दौरान पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

इस घटनाक्रम ने पिछले 15 वर्षों के दौरान दिल्ली में हुए उन प्रमुख जन आंदोलनों की यादें ताजा कर दी, जब हजारों लोगों ने अपनी मांगों को सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने की कोशिश की थी।

वर्ष 2021 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर परेड उन सबसे बड़े प्रदर्शनों में शामिल थी, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने मध्य दिल्ली की ओर कूच किया था।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले एक वर्ष लंबे आंदोलन के तहत 26 जनवरी, 2021 को हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर एकत्र होने के बाद ट्रैक्टरों के साथ राष्ट्रीय राजधानी में दाखिल हुए थे।

यद्यपि ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्गों की अनुमति दी गई थी। लेकिन, उस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी अवरोधक तोड़कर तय मार्ग से हटकर मध्य दिल्ली की ओर बढ़ गए थे, जिससे पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।

कुछ प्रदर्शनकारी लाल किले के परिसर में भी प्रवेश कर गए थे और उसकी प्राचीर पर ‘निशान साहिब’ तथा किसान संगठनों के झंडे फहरा दिए थे। इस हिंसा में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

कॉजपा के समर्थक सोमवार को तिरंगा लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कई पुलिस अवरोधक पार कर लिए।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बल का प्रयोग किया।

संसद या मध्य दिल्ली के अन्य उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों की ओर मार्च करने के प्रयास पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े आंदोलनों की प्रमुख विशेषता रहे हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखने के उद्देश्य से ऐसा करते रहे हैं।

वर्ष 2011 में सामाजिक एवं गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में चला भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन राजधानी के सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक था। हजारे की गिरफ्तारी के बाद हजारों लोग तिहाड़ जेल के बाहर एकत्र हुए थे। बाद में हजारे रामलीला मैदान पहुंचे, जहां उनके 13 दिन के अनशन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सशक्त लोकपाल कानून की मांग की गई।

वर्ष 2012 के निर्भया आंदोलन के दौरान हजारों छात्र, युवा पेशेवर और आम नागरिक इंडिया गेट तथा रायसीना हिल पर एकत्र हुए थे और कई बार संसद तथा राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लिया था।

वर्ष 2019 और 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भी दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों के प्रदर्शन और शाहीन बाग में लंबे समय तक चले धरने में हजारों लोग शामिल हुए।

इस आंदोलन के दौरान सड़कों को बंद करना, भारी पुलिस बल की तैनाती और कुछ समय के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद करना आम बात हो गई थी।

तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक वर्ष तक चले किसान आंदोलन के दौरान भी दिल्ली की सीमाएं प्रमुख प्रदर्शन स्थलों में बदल गई थीं।

हजारों किसानों ने दिल्ली में प्रवेश से रोके जाने के बाद सिंघू, टीकरी और गाजीपुर सीमाओं पर डेरा डाल दिया था। यह आंदोलन तब तक जारी रहा, जब तक केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस नहीं ले लिए।

वर्ष 2023 में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कई प्रमुख पहलवानों ने नवनिर्मित संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया था। इस घटना ने देशभर का ध्यान आकर्षित किया था।

सोमवार का प्रदर्शन एक बार फिर मध्य दिल्ली की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी का कारण बना और राष्ट्रीय राजधानी में पिछले वर्षों के प्रमुख जन आंदोलनों की सूची में एक और घटना जुड़ गई।

भाषा रवि कांत दिलीप

दिलीप