समिति के सदस्यों का सवाल: क्या पद से हटाने के प्रस्तावित कानून के दायरे में नेता प्रतिपक्ष भी होंगे
समिति के सदस्यों का सवाल: क्या पद से हटाने के प्रस्तावित कानून के दायरे में नेता प्रतिपक्ष भी होंगे
नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) संसद की एक समिति के सदस्यों ने बुधवार को यह सवाल किया कि क्या नेता प्रतिपक्ष का पद भी उस प्रस्तावित कानून के दायरे में आता है जिसके तहत गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को उनके पद से हटाने का प्रावधान है।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है।
समिति ने विधि आयोग के अध्यक्ष दिनेश माहेश्वरी और कुछ अन्य के विचारों को सुना।
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति जीएस बाजपेयी और हैदराबाद स्थित ‘नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च’ (नैलसर) के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव भी इस संयुक्त समिति के सामने उपस्थित हुए।
पूरे घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने बताया कि कई सदस्यों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या विपक्ष के नेता को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होने के बाद एक महीने के भीतर जमानत नहीं मिलने पर पद से हटाया जा सकता है।
विपक्ष के एक नेता ने तीन मसौदा कानूनों पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए उन राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित करने की जोरदार वकालत की, जो संयुक्त समिति का हिस्सा नहीं हैं। समिति के सदस्यों का एक वर्ग विपक्षी सदस्य द्वारा व्यक्त किये गये विचार से सहमत नहीं था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी, शिरोमणि अकाली दल नेता हरसिमरत कौर बादल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्य एस निरंजन रेड्डी 31 सदस्यीय समिति में शामिल विपक्षी सदस्य हैं।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, शिवसेना (उबाठा) और आम आदमी पार्टी (आप) ने यह कहते हुए समिति का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था कि ये विधेयक कानून के उस मूल सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं कि किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।
सारंगी ने संवाददाताओं से कहा कि बुधवार को समिति के सामने पेश हुए विशेषज्ञों को समिति के समक्ष लिखित प्रस्तुति देने के लिए कहा गया है।
भाषा हक हक पवनेश
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