कांग्रेस का आरोप, राफेल पर कोर्ट को गुमराह कर रही केंद्र सरकार

कांग्रेस का आरोप, राफेल पर कोर्ट को गुमराह कर रही केंद्र सरकार

कांग्रेस का आरोप, राफेल पर कोर्ट को गुमराह कर रही केंद्र सरकार
Modified Date: November 29, 2022 / 07:49 pm IST
Published Date: December 16, 2018 6:15 am IST

नई दिल्ली। राफेल मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार आदेश में भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (C&AG) और लोक लेखा समिति (PAC) के समक्ष राफेल संबंधी रिपोर्ट के जिक्र को हथियार बनाकर गुमराह कर रही है।

आपको बतादें लोक लेखा समिति यानी पीएसी के चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार ने कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल यानी कैग की रिपोर्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है और पीएसी अटॉर्नी जनरल को तलब कर सकती है। कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा, “मैं इस मामले को पीएसी के दूसरे सदस्यों के समक्ष उठाने जा रहा हूं. हम अटॉर्नी जनरल और कैग को भी तलब करेंगे.”

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मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने धोखे से काम किया है। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट जांच एजेंसी नहीं है। ऐसे में राफेल की जांच जेपीसी से कराई जानी चाहिए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में जिक्र किया गया था कि राफेल की कीमत संबंधी जानकारी कैग को साझा की गई है, जिसकी रिपोर्ट संसद की लोक लेखा समिति के पास है। इस बारे में कहा गया कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया और यह सार्वजनिक है। बस कोर्ट के निर्णय के इसी हिस्से को हथियार बनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने PAC मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ प्रेस कांफ्रेंस में हमला बोलते हुए कहा कि समिति के चेयरमैन खड़गे खुद कह रहे हैं कि ऐसी कोई रिपोर्ट उनके समक्ष नहीं रखी गई, तो क्या कोई समानांतर PAC चल रही है?

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कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि अब सरकार की तरफ से जो कहा जा रहा है वह सही मायने में न्यायालय पर उसके द्वारा से सील्ड कवर में दिए गए तथ्यों की गलत व्याख्या का दोष मढ़ना है। उन्हें कहना चाहिए था कि कीमत (राफेल की) से जुड़ी डिटेल कैग के साथ साझा की गई है, यह मामला अभी PAC के समक्ष नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट से जो कहा गया उसपर विश्वास करते हुए उसने आदेश दिया। अब वे (सरकार) शर्मिंदा हैं और कोर्ट को भी शर्मिंदा कर रहे हैं। कोर्ट के निर्णय का सिर्फ यही हिस्सा नहीं है जो तथ्यात्मक तौर पर गलत है।


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