कांग्रेस नेताओं ने ‘शुद्धीकरण’ मामले में थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की

कांग्रेस नेताओं ने ‘शुद्धीकरण’ मामले में थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की

कांग्रेस नेताओं ने ‘शुद्धीकरण’ मामले में थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की
Modified Date: September 8, 2026 / 07:09 pm IST
Published Date: September 8, 2026 7:09 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) कांग्रेस के कई सांसदों और नेताओं ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल का कथित तौर पर ‘शुद्धीकरण’ किए जाने के मामले में मंगलवार को संसद मार्ग थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

पार्टी के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित करीब 20 सांसद और कुछ नेता मंगलवार को संसद मार्ग थाने पहुंचे और इस मामले में शिकायत दी।

कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने इस संदर्भ में लिखित शिकायत दी तथा पुलिस से मामले में ‘श्री राम धर्मार्थ सेवा न्यास’ के अध्यक्ष गिरीश चंद्र पांडे और 15 अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

रवि ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि पांडे और 15 अज्ञात लोगों ने ‘‘आपराधिक साजिश’’ के तहत आठ अगस्त को खरगे के वहां सभा को संबोधित करने के दो दिन बाद, 10 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में यज्ञ किया और गंगाजल का छिड़काव किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘शुद्धीकरण’ का यह कृत्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के सदस्यों का अपमान और उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से किया गया तथा यह समानता और अस्पृश्यता उन्मूलन की संवैधानिक गारंटी के खिलाफ है।

रवि ने कहा कि इस घटना से उनकी और उनके समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. राजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हम करीब 20 कांग्रेस सांसदों के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे और 10 अगस्त को हल्द्वानी में शुद्धीकरण के कृत्य को लेकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत ‘‘शून्य एफआईआर’’ दर्ज कराने का अनुरोध किया।’’

राजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि सांसदों द्वारा करीब दो घंटे तक आग्रह किए जाने के बावजूद थाना प्रभारी (एसएचओ) ने जीरो एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने ‘शून्य एफआईआर’ दर्ज नहीं करने के कारण लिखित में देने से भी इनकार कर दिया।

राजू ने कहा, ‘‘अगर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सांसदों के साथ ऐसा हो रहा है, तो कल्पना की जा सकती है कि अत्याचार की स्थिति में आम एससी/एसटी नागरिकों को प्राथमिकी दर्ज कराने में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता होगा।’’

रवि ने पुलिस से मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

भाषा हक हक नरेश

नरेश


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