भाजपा-जद (एस) गठबंधन में दरार डालने के लिए कांग्रेस ने देवेगौड़ा को लेकर जताई सहानुभूति: कुमारस्वामी
भाजपा-जद (एस) गठबंधन में दरार डालने के लिए कांग्रेस ने देवेगौड़ा को लेकर जताई सहानुभूति: कुमारस्वामी
मांड्या (कर्नाटक), नौ जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने मंगलवार को कहा कि कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस 2008 के विधानसभा चुनावों में जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच हुए गठबंधन के प्रभावों को लेकर चिंतित है।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि कांग्रेस पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा को राज्यसभा सीट न मिलने पर सहानुभूतिपूर्ण टिप्पणियां करके इस गठबंधन में दरार पैदा करने की कोशिश कर रही है।
यह स्पष्टीकरण कांग्रेस नेताओं की उस आलोचना के बाद आया है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर देवेगौड़ा को राज्यसभा के लिए नामित नहीं करने का आरोप लगाया था।
कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘कांग्रेस अब देवेगौड़ा के प्रति सहानुभूति दिखा रही है। हर कोई जानता है कि उन्होंने (कांग्रेस ने) देवेगौड़ा के 70 साल के राजनीतिक जीवन में उनके साथ कैसा व्यवहार किया। मैं अभी इस पर चर्चा नहीं करना चाहता। वे देवेगौड़ा के प्रति सहानुभूति इसलिए दिखा रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा-जद (एस) गठबंधन से डरे हुए हैं।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को समझ आ गया है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में क्या होगा, इसलिए उनका इरादा गठबंधन में फूट डालना है।
उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत में पूछा, ‘‘क्या जद(एस) या देवेगौड़ा ने राज्यसभा सीट मांगी थी?’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘यह हमारी चिंता का विषय नहीं है; भाजपा के पास 60 से अधिक विधायक हैं। अगर हम राज्यसभा सीट मांगते हैं, तो देवेगौड़ा के बारे में जनता की राय क्या होगी? कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं कि देवेगौड़ा वहां (संसद में) कर्नाटक की आवाज बुलंद कर सकते थे, जो एक अलग बात है। वह (पूर्व प्रधानमंत्री) सत्ता में हों या न हों, (लेकिन) मैं उनके (देवेगौड़ा के) राज्य के लिए आवाज उठाने के कई उदाहरण दे सकता हूं।’’
भाजपा ने रविवार देर रात कर्नाटक से प्रो. एम. नागराज को अपना राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया। राज्य विधानसभा में अपनी मौजूदा ताकत के आधार पर भाजपा 18 जून को होने वाले चुनाव में चार सीटों में से एक सीट जीत सकती है।
यह चुनाव इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि देवेगौड़ा सहित चार सांसदों का कार्यकाल इस महीने समाप्त हो रहा है। जद (एस) कथित तौर पर उम्मीद कर रही थी कि भाजपा देवेगौड़ा को फिर से राज्यसभा के लिए नामित करेगी।
कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि देवेगौड़ा सत्ता के लिए कभी दूसरों के दरवाजे पर नहीं गए। उन्होंने कहा कि पूरे पांच साल तक प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का मौका होने के बावजूद, देवेगौड़ा पद छोड़कर वापस आ गए और कहा कि उनके आत्मसम्मान को जहां ठेस पहुंची, वह वहां नहीं रहेंगे।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘क्या उन्हें राज्यसभा सीट के लिए संघर्ष करना पड़ेगा? उन्हें भगवान से केवल अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यकता है।’’
जद (एस) नेता ने कांग्रेस पार्टी के उन दावों को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने पिछली बार जून 2020 में देवेगौड़ा का राज्यसभा में ‘प्रवेश’ सुनिश्चित किया था।
उन्होंने पूछा, ‘‘यह कहां और कब हुआ? कांग्रेस के पास दूसरा उम्मीदवार खड़ा करने के लिए संख्या कहाँ थी?’’
कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार गिरने के बाद की स्थिति का विवरण देते हुए कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘उन्होंने (कांग्रेस ने) यह सुनिश्चित किया था कि देवेगौड़ा 2019 का लोकसभा चुनाव तुमकुर से हार जाएं। जब चार सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हुए, तो न तो भाजपा और न ही जद (एस) के पास अतिरिक्त सीट के लिए उम्मीदवार खड़ा करने की पर्याप्त संख्या थी। उस समय येदियुरप्पा मुख्यमंत्री थे और उन्होंने मुझसे कहा कि भाजपा उम्मीदवार नहीं उतारेगी। येदियुरप्पा ने मुझसे यह सुनिश्चित करने को कहा था कि गौड़ा चुनाव लड़ें और जीतें, क्योंकि राज्यसभा में उनकी उपस्थिति जरूरी थी।’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘देवेगौड़ा तब राज्यसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन मैंने उन्हें मजबूर किया। यह स्थिति के अनुरूप निर्मित अवसर था, न कि कांग्रेस के समर्थन के कारण।’’
देवेगौड़ा को राज्यसभा भेजने के लिए समर्थन न देकर भाजपा द्वारा वोक्कालिगा समुदाय के साथ अन्याय करने के कांग्रेस के दावे पर तंज कसते हुए कुमारस्वामी ने (डी के शिवकुमार का संदर्भ देते हुए) कहा, ‘‘जब हमारे पास एक वोक्कालिगा समुदाय के मुख्यमंत्री हैं, तो राज्यसभा क्यों? अन्याय कैसे हुआ?’’
मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से मिल रहे हैं, ऐसे में कुमारस्वामी से मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें क्या सलाह दे सकता हूं? जब उन्होंने (शिवकुमार ने) हाल ही में तुमकुर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि कुमारस्वामी दो बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने क्या किया है? जब मैंने कुछ किया ही नहीं, तो मैं क्या सुझाव दे सकता हूं? उन्हें मुझसे क्या सलाह मिल सकती है? वह जो चाहते हैं, वह सिर्फ अखबारों में आने के लिए एक तस्वीर है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या 2028 में कर्नाटक में भाजपा-जद(एस) गठबंधन के सरकार गठन की स्थिति में वह मुख्यमंत्री बनेंगे, कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री बनने से ज्यादा, मैं अपने लोगों की रक्षा करना चाहता हूं। इसलिए गठबंधन को मजबूत करना मेरी प्राथमिकता है।’’
भाषा
सुरेश नरेश
नरेश

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