नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से इस बात पर विचार करने को कहा कि क्या सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए ऐसा वैधानिक ढांचा बनाया जा सकता है, जिससे वे और अन्य डिजिटल मंच 18 साल से कम उम्र के बच्चों के स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने पर लगी कानूनी रोक समेत नाबालिगों से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन करें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 10 सितंबर को याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच. एस. फुल्का की दलीलों का संज्ञान लिया था और इस याचिका पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा कानून एवं न्याय मंत्रालयों से जवाब मांगा था। पीठ ने कहा था, ‘‘भारत में हमें कुछ सुरक्षा उपायों की जरूरत है।’’
याचिका में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले नाबालिगों के लिए सुरक्षा उपाय और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया कि कोई भी ऐसा मंच 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ अनुबंध न करे।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को पीठ से कहा, ‘‘कुछ किया जा सकता है, कुछ किया जाना चाहिए और किया जाएगा। हमें फिर से आना होगा…’’
फुल्का ने दलील दी कि मौजूदा भारतीय कानून के तहत नाबालिगों द्वारा किए गए अनुबंध अमान्य होते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल मंचों के लिए केवल स्वैच्छिक दिशानिर्देशों के बजाय ऐसे बाध्यकारी दायित्व तय किए जाने चाहिए, जिनका पालन सुनिश्चित किया जा सके।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह आवश्यकता केवल दिशानिर्देश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से इस पर गौर करने को कहा कि क्या इसे मध्यस्थ संबंधी नियमों के तहत वैधानिक प्रावधान के रूप में शामिल किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, ‘‘कृपया मध्यस्थ संबंधी नियमों के तहत निर्देश जारी करें कि वे अपने सॉफ्टवेयर या मंच को भारतीय कानून के अनुरूप तैयार करें। सॉफ्टवेयर को भारतीय कानून के अनुरूप होना चाहिए। हमारा आग्रह यही है।
फुल्का ने कहा कि प्रस्तावित डेटा संरक्षण ढांचे का इंतजार करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा कानून नाबालिगों के अनुबंध करने पर रोक लगाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा भारतीय कानून के तहत ये अनुबंध अमान्य हैं। हमें डेटा संरक्षण कानून का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा कानून ही इन पर रोक लगाता है।’’
मेहता ने पीठ को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर गौर करेगी और उचित कदम उठाएगी।
याचिका में केंद्र को निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि वह सोशल मीडिया मध्यस्थों समेत ‘डिजिटल मंच’ को सूचित करने के लिए उचित कदम उठाए कि 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी नाबालिग के साथ उनके द्वारा किया गया अनुबंध शुरुआत से ही अमान्य है और उसके आधार पर उठाए गए किसी भी कदम को तत्काल रोक दिया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट (भारत) जैसे मंच 13 वर्ष की उम्र से उपयोगकर्ताओं को अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं, जबकि भारतीय कानून 18 वर्ष से कम उम्र वालों को नाबालिग मानता है।
भाषा आशीष दिलीप
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