न्यायालय ने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों के प्रावधान लागू करने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया

न्यायालय ने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों के प्रावधान लागू करने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया

न्यायालय ने आरटीई के तहत आरक्षित सीटों के प्रावधान लागू करने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया
Modified Date: January 13, 2026 / 10:40 pm IST
Published Date: January 13, 2026 10:40 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने का निर्देश दिया कि निजी गैर-सहायता प्राप्त गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए प्रवेश में 25 प्रतिशत कोटा लागू हो।

न्यायालय ने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में गरीब बच्चों को प्रवेश देना ‘‘एक राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बच्चों को प्रवेश देना उपयुक्त सरकार और स्थानीय प्राधिकार का दायित्व है। न्यायालय ने कहा कि इसी तरह, अदालतों को, चाहे वे संवैधानिक हों या दीवानी, उन अभिभावकों को सुगम पहुंच और प्रभावी राहत प्रदान करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने चाहिए जो इस अधिकार से वंचित होने की शिकायत करते हैं।

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न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत प्रवेश पाने में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों के समक्ष आने वाली कठिनाइयों से संबंधित पहलुओं पर विचार कर रही है, जिसमें निजी गैर-सहायता प्राप्त गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया गया है।

पीठ एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिनके बच्चों को 2016 में पड़ोस के एक स्कूल में मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के लिए प्रवेश नहीं मिला था, जबकि सीटें उपलब्ध थीं। इसके बाद, उन्होंने मुंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था।

उच्च न्यायालय ने आरक्षित सीटों को भरने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के अनुसार आवेदन न करने के आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

पीठ ने कहा कि ‘‘दुर्भाग्यवश’’, उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध याचिका लंबे समय से लंबित थी।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि याचिकाकर्ता जैसे अभिभावकों को इस तरह की स्थिति का बार-बार सामना न करना पड़े, हमने इस मामले को एक मिसाल कायम करने के लिए उचित समझा और आरटीई अधिनियम की धारा 12 (निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिए विद्यालय की जिम्मेदारी का दायरा) के प्रावधान का अनुपालन करने की प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की जांच करने का निर्णय लिया।’’

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


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