अदालत ने समलैंगिक जोड़े को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया

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अदालत ने समलैंगिक जोड़े को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 12:40 AM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 12:40 AM IST

प्रयागराज, 19 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक समलैंगिक जोड़े को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है जिसे परिजनों से जान से मारने की धमकी मिल रही थी।

न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि संबंधित महिला समलैंगिक जोड़े को परिजनों या किसी अन्य व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना शांतिपूर्वक साथ जीवन जीने की स्वतंत्रता है।

यह जोड़ा अलग-अलग धर्मों से है।

इस जोड़े के वकील ने दलील दी कि इन्हें इनके परिजनों से जान का खतरा है इसलिए इन्हें तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।

वहीं, राज्य सरकार के वकील ने कहा कि समलैंगिक रिश्तों की स्वीकार्यता नहीं है क्योंकि इससे समाज का प्राकृतिक एवं पारंपरिक ताना-बाना प्रभावित होता है।

अदालत ने जोड़े से संवाद करने के बाद कहा कि ये बालिग हैं और उन्होंने बिना किसी दबाव, भय या अनुचित प्रभाव के साथ रहने का निर्णय किया है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा तय कानून पर विचार करते हुए अदालत कहा कि ‘लिव-इन’ संबंध में रहना उन दो वयस्क नागरिकों का मौलिक अधिकार है जिन्होंने अपनी पसंद से साथ रहने का निर्णय किया है।

अदालत ने कहा कि परिजनों, अन्य रिश्तेदारों या समाज के किसी वर्ग को इनकी भौतिक स्वतंत्रता में बाधा डालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

इसने 14 सितंबर को दिए अपने निर्णय में कहा कि वैवाहिक मान्यता नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि किसी को वयस्क नागरिकों की गरिमा और शारीरिक सुरक्षा पर हमला करने की छूट मिल जाए।

भाषा सं राजेंद्र शोभना नेत्रपाल

नेत्रपाल