यूक्रेन से युद्ध के दौरान कब्जे में लिए गए क्षेत्रों में रूस ने संसदीय चुनाव कराया

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यूक्रेन से युद्ध के दौरान कब्जे में लिए गए क्षेत्रों में रूस ने संसदीय चुनाव कराया

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 08:50 AM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 08:50 AM IST

कीव, 20 सितंबर (एपी) रूस के संसदीय चुनाव में पहली बार उन क्षेत्रों के निवासी भी शामिल हो रहे हैं, जिन पर मॉस्को ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू करने के बाद कब्जा कर लिया था।

यह रूस के राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय ‘क्रेमलिन’ द्वारा अपने कब्जे वाले क्षेत्रों पर नियंत्रण मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।

कीव के अधिकारियों ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अवैध बताया है। वहीं, एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि इन क्षेत्रों के निवासियों को चुनाव में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

रूस में मतदान शुक्रवार से शुरू हुआ और रविवार तक जारी रहेगा। इसका उद्देश्य मतदान प्रतिशत बढ़ाना है। हालांकि, यूक्रेन के रूस द्वारा कब्जाए क्षेत्रों और रूस की सीमा से लगे कुछ इलाकों में पिछले महीने के अंत से ही मतदान शुरू हो गया था। अधिकारियों ने इतनी लंबी प्रक्रिया के लिए सुरक्षा कारणों का हवाला दिया।

रूसी अधिकारियों के अनुसार, दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में 35 लाख से अधिक मतदाता हैं। मॉस्को के अधिकारी अक्सर इन क्षेत्रों को “नए क्षेत्र” कहते हैं।

रूस ने सितंबर 2022 में इन क्षेत्रों को अपने में मिला लिया था, जबकि उस समय ये क्षेत्र पूरी तरह उसके नियंत्रण में नहीं थे। रूस के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है।

दोनेत्स्क क्षेत्र के रूस के कब्जे वाले हिस्से में एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं ने मतपेटी में अपने मत डाले, जबकि पास में एक रूसी सैनिक हथियार लेकर खड़ा होकर निगरानी कर रहा था।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को दिए एक भाषण में इन क्षेत्रों में निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ के लिए मतदान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के निवासी ‘‘रूस के साथ पुन:एकीकरण के बाद पहली बार’’ ड्यूमा के लिए मतदान करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई में शामिल रूसी सैनिक भी मतदान करेंगे।

काला सागर में स्थित क्रीमिया में भी मतदान हो रहा है, जिस पर मॉस्को ने 2014 में कब्जा कर लिया था।

स्टेट ड्यूमा के लिए युद्ध के दौरान पहली बार हो रहा यह चुनाव क्रेमलिन के राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत करने और युद्ध के लिए जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कराया जा रहा है।

कीव के अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में हो रहे मतदान को अवैध करार दिया और विदेशी सरकारों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से चुनाव को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया।

उन्होंने यूक्रेन के लोगों को चेतावनी दी कि मतदान में भाग लेने पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

वहीं, यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगांद ने कहा कि रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून का एक और खुला उल्लंघन’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ न तो अस्थायी रूप से कब्जे वाले यूक्रेन के क्षेत्रों में इन तथाकथित, दिखावटी चुनावों के आयोजन को और न ही इनके परिणामों को मान्यता देता है और न कभी देगा।’’

एपी गोला सिम्मी

सिम्मी