न्यायालय ने सेवारत न्यायिक अधिकारी, उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

न्यायालय ने सेवारत न्यायिक अधिकारी, उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

न्यायालय ने सेवारत न्यायिक अधिकारी, उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
Modified Date: April 16, 2026 / 10:16 pm IST
Published Date: April 16, 2026 10:16 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में सेवारत एक न्यायिक अधिकारी को मिल रही धमकियों के मद्देनजर पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया।

अधिकारी का 2008 में अपहरण कर लिया गया था और अब उन्हें इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों से धमकियां मिल रही हैं। यह घटना उस समय हुई थी जब वह नाबालिग थे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गुजरात पुलिस को याचिकाकर्ता के भाई को खतरे की आशंका का आकलन करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। याचिकाकर्ता के भाई भी न्यायिक अधिकारी हैं।

अदालत ने सेवारत न्यायिक अधिकारी द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। इसमें अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि अपहरण मामले में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा प्राप्त लोगों की धमकियों के मद्देनजर उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘दोषियों या उनके सहयोगियों के अतीत को ध्यान में रखते हुए, हमें लगता है कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए कुछ आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की आवश्यकता है।’’

शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना दोषियों को पैरोल या सजा में छूट नहीं दी जाएगी।

पीठ ने कहा कि दोषियों द्वारा सजा में छूट के अनुरोध वाली याचिका पर विचार कर रहा पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय अगर उन्हें पैरोल या रियायत प्रदान करता है तो आदेश को दो सप्ताह तक प्रभावी नहीं किया जाएगा ताकि याचिकाकर्ता उचित उपचारात्मक कदम उठा सके।

न्यायालय ने कहा कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में, जहां याचिकाकर्ता का परिवार रहता है, संबंधित अधिकारियों की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे। न्यायालय ने याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली पुलिस को खतरे की आशंका का आकलन करने और याचिकाकर्ता को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत


लेखक के बारे में