कोच्चि, 28 सितंबर (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने राष्ट्र ध्वज को उल्टा पकड़कर ‘व्हाट्सऐप’ पर अपनी तस्वीर साझा करने पर कोझिकोड के एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गयी प्राथमिकी एवं उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया था।
न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो साक्ष्य पेश किये उनसे यह साफ है कि आरोपी का ‘कभी भी भारतीय राष्ट्र ध्वज को केसरिया रंग वाले हिस्से को नीचे करके प्रदर्शित करने का इरादा नहीं था और इसे प्रदर्शित करते समय उससे गलती हुई थी।
इस बात को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के कवरत्ती थाने में आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और एंड्रॉथ की मजिस्ट्रेट अदालत में चल रही संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया।
आरोपी ने दावा किया कि उसने राष्ट्र ध्वज के सम्मान में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हिस्सा लिया था और इसी के तहत कोझिकोड में अपने घर पर पत्नी के साथ एक फ़ोटो खिंचवाया एवं उसे लक्षद्वीप के भाजपा सदस्यों वाले एक निजी ‘व्हाट्सऐप ग्रुप’ में भेज दिया।
हालांकि, आरोपी का दावा था कि फ़ोटो खिंचवाते समय राष्ट्र ध्वज का केसरिया रंग वाला हिस्सा अनजाने में नीचे की ओर हो गया था और ऐसा न तो जान-बूझकर किया गया था और न ही यह कोई सोची-समझी हरकत थी।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश