यमुना के डूब क्षेत्र से बेदखली पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

यमुना के डूब क्षेत्र से बेदखली पर रोक लगाने से अदालत का इनकार

यमुना के डूब क्षेत्र से बेदखली पर रोक लगाने से अदालत का इनकार
Modified Date: October 10, 2024 / 07:52 pm IST
Published Date: October 10, 2024 7:52 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने यमुना नदी के डूब क्षेत्र में स्थित एक अनधिकृत कॉलोनी के निवासियों को जारी बेदखली नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए टिप्पणी की है कि नदी में प्रदूषण अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

उच्च न्यायालय ने इस तर्क पर गौर किया कि दक्षिणी दिल्ली की कॉलोनी डूब क्षेत्र में नहीं आती, क्योंकि बाढ़ का खतरा 25 साल में केवल एक बार था और यहां पानी नहीं टिकता है।

मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा, ‘‘भले ही यह मान लिया जाए कि श्रम विहार कॉलोनी डूब क्षेत्र के बाहर स्थित है, फिर भी यह जोन ‘ओ’ श्रेणी के अंतर्गत आता है जो पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है और जिसका उपयोग मुख्य रूप से बागवानी के लिए किया जा रहा है और इसमें वनस्पतियों और जीवों की प्रचुरता है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘यह ध्यान में रखने की जरूरत है कि जोन ‘ओ’ की कल्पना यमुना नदी के कायाकल्प और नदी के पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए की गई है।’’

पीठ ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि वहां रहने वाले लोग बेदखली नोटिस पर किसी भी तरह की रोक के हकदार नहीं हैं।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के निष्कर्ष पर आधारित एक हालिया खबर का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जहां नदी शहर से बाहर निकलती है वहां कोलीफॉर्म (एक प्रकार का जीवाणु) का स्तर स्वीकार्य सीमा से 1,959 गुना और वांछित सीमा से 9,800 गुना अधिक है।

भाषा संतोष अविनाश

अविनाश


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