अदालत ने धोखाधड़ी मामले में पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
अदालत ने धोखाधड़ी मामले में पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
नयी दिल्ली, नौ जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अयोग्य ठहराए गए मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की उस याचिका पर बृहस्पतिवार को आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी के एक मामले में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
यह मामला 1998 से 2011 के बीच अवैध तरीके से ब्याज हासिल करने के लिए बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी करने से संबंधित है।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में पूर्व विधायक को सुनाई गई तीन साल की सजा पर 28 अप्रैल को रोक लगा दी थी।
भारती के वकील ने कहा कि एक बार दोषसिद्धि पर रोक लग जाने के बाद, उन्हें अयोग्य ठहराये जाने का कोई आधार नहीं रहेगा और इसके परिणामस्वरूप उनकी विधानसभा सीट को रिक्त घोषित नहीं किया जायेगा।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। आदेश सुरक्षित रखा गया।’’
भारती के वकील ने पहले दलील दी थी कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उनकी अपील में कानून और तथ्यों से जुड़े ‘‘महत्वपूर्ण’’ सवाल उठाए गए हैं।
निचली अदालत ने दो अप्रैल को इस मामले में जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का असली दस्तावेज की तरह उपयोग) के तहत भारती को एक अप्रैल को दोषी ठहराया गया था।
निचली अदालत ने भारती पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
यह मामला मध्य प्रदेश के दतिया से जुड़ा था। इस मामले को पिछले साल अक्टूबर में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था। यह कदम इस दावे के मद्देनजर उठाया गया था कि बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयास किए गए थे।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
पवनेश

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