फैज इलाही मस्जिद से सटी भूमि से ढांचे हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने जवाब मांगा
फैज इलाही मस्जिद से सटी भूमि से ढांचे हटाने के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने जवाब मांगा
नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली वक्फ बोर्ड से मंगलवार को उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें तुर्कमान गेट स्थित सैयद फैज इलाही मस्जिद और कब्रिस्तान से सटी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी गई है।
आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास एक कार में विस्फोट करने से पहले पुरानी दिल्ली की 100 साल पुरानी इस मस्जिद में गया था और वहां 10 मिनट से अधिक समय तक रुका। कार में हुए इस विस्फोट में 15 लोगों की जान चली गई थी।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने मस्जिद सैयद फैज इलाही की प्रबंध समिति द्वारा दायर याचिका पर एमसीडी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), शहरी विकास मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय (एल एंड डीओ), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूएस) और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किए।
अदालत ने कहा कि ‘मामले पर विचार करने की आवश्यकता है’ और अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की।
इस याचिका में एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि 0.195 एकड़ से अधिक भूमि पर बने सभी ढांचे ध्वस्त किए जाने चाहिए और मस्जिद की प्रबंध समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड भूमि के स्वामित्व या कब्जे को वैध साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर पाए हैं। 0.195 एकड़ भूमि पर मस्जिद स्थित है।
एमसीडी ने यह निर्णय उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के 12 नवंबर 2025 के आदेश के संदर्भ में लिया था, जिसमें नगर निकाय और पीडब्ल्यूडी को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान में 38,940 वर्ग फुट के अतिक्रमण को हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
अतिक्रमणों में सड़क का कुछ हिस्सा, एक फुटपाथ, एक बारात घर, एक पार्किंग क्षेत्र और एक निजी डायग्नोस्टिक केंद्र शामिल है।
उच्च न्यायालय ने ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नामक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था।
एमसीडी के वकील ने अदालत में कहा था कि 0.195 एकड़ (934 वर्ग गज) भूमि 15 फरवरी 1940 को पट्टे पर दी गई थी और पट्टे के अंतर्गत आने वाली भूमि के संबंध में कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है।
भाषा
नोमान दिलीप
दिलीप

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