पत्नी को जला कर मारने के मामले में न्यायालय ने आरोपी की सजा बरकरार रखी

पत्नी को जला कर मारने के मामले में न्यायालय ने आरोपी की सजा बरकरार रखी

पत्नी को जला कर मारने के मामले में न्यायालय ने आरोपी की सजा बरकरार रखी
Modified Date: March 17, 2026 / 07:57 pm IST
Published Date: March 17, 2026 7:57 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2000 में पत्नी को आग लगाकर मारने के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को मंगलवार को बरकरार रखा और कहा कि पीड़िता के मृत्यु पूर्व दिए गए अंतिम बयान पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है।

शीर्ष अदालत ने घटना की प्रत्यक्षदर्शी और दंपती की बड़ी बेटी की गवाही को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उसके बयान से साबित होता है कि उसके पिता केरोसिन लाए, उसे उसकी मां पर डाला और आग लगा दी।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल एवं न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा, “रिकॉर्ड में ऐसी कोई सामग्री नहीं है जिससे यह पता चले कि वह क्यों अपने पिता के खिलाफ झूठी गवाही देगी।”

पीठ ने आरोपी की ओर से दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कर्नाटक उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उसे बरी कर दिया गया था।

भाषा रंजन नरेश

नरेश


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