माकपा सांसद ने जर्मन चांसलर की यात्रा के दौरान बच्ची अरिहा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया

माकपा सांसद ने जर्मन चांसलर की यात्रा के दौरान बच्ची अरिहा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया

माकपा सांसद ने जर्मन चांसलर की यात्रा के दौरान बच्ची अरिहा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया
Modified Date: January 7, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: January 7, 2026 4:52 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर उनसे भारतीय बच्ची अरिहा शाह की स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। अरिहा साढ़े चार साल से अधिक समय से जर्मनी में देखभाल केंद्र में रह रही है।

ब्रिटास ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लगभग पांच साल की हो चुकी अरिहा, का पालन पोषण जर्मन बाल सेवा विभाग की देखरेख में हो रहा है, जबकि संबंधित जर्मन अस्पताल ने दुर्व्यवहार के किसी भी सबूत को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है और अदालत द्वारा नियुक्त मनोवैज्ञानिक ने माता-पिता को उसका संरक्षण प्रदान करने की सिफारिश की है।

 ⁠

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की 12-13 जनवरी को दो दिवसीय भारत यात्रा से पहले माकपा सांसद ने विदेश मंत्री को यह पत्र लिखा है।

बच्ची के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद, जर्मन अधिकारियों ने 23 सितंबर, 2021 को अरिहा शाह को अपनी हिरासत में ले लिया, जब वह सात महीने की थी।

ब्रिटास ने कहा कि जर्मन चांसलर की यह यात्रा नाबालिग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, पारिवारिक एकजुटता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार संधियों के पालन सहित आपसी हित के मुद्दों पर रचनात्मक जुड़ाव के लिए उचित और सार्थक अवसर प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा, “यह स्थिति घोर अन्यायपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अरिहा के अधिकारों का उल्लंघन करती है। पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक होने के नाते, वह संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन के अनुसार, परिजन की देखभाल में रहने और अपनी पहचान, भाषा और धर्म के संरक्षण की हकदार है। इस संधि पर जर्मनी और भारत दोनों ने हस्ताक्षर किए हैं।”

माकपा सांसद ने कहा, ‘‘वहां के माहौल में रहने दौरान बच्ची अपनी विरासत से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई है। विशेष रूप से दुखद बात यह है कि जैन समुदाय की इस बच्ची को कथित तौर पर मांसाहारी भोजन दिया जा रहा है, जबकि उसके परिवार ने बार-बार शाकाहारी भोजन की मांग की है।’’

ब्रिटास ने बताया कि बच्ची के पालक परिवार को पांच बार बदला जा चुका है, जिससे वह किसी भी स्थिर देखभाल वाले वातावरण से वंचित है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जर्मन नेता की भारत की आगामी पहली आधिकारिक यात्रा इस मुद्दे को उच्चतम राजनीतिक स्तर पर हल करने का एक महत्वपूर्ण राजनयिक अवसर प्रदान करती है।

ब्रिटास ने आग्रह किया कि बच्ची के सर्वोत्तम हित में मानवीय और कानूनी समाधान सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस मामले को निर्णायक रूप से उठाया जाए।

भाषा आशीष मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में