सीआरपीएफ ने आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए बनाया शीर्ष अधिकारियों का ‘कोर ग्रुप’

सीआरपीएफ ने आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए बनाया शीर्ष अधिकारियों का 'कोर ग्रुप'

सीआरपीएफ ने आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए बनाया शीर्ष अधिकारियों का ‘कोर ग्रुप’
Modified Date: August 20, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: August 20, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने कर्मियों के बीच खुद को नुकसान पहुंचाने (सेल्फ-हार्म) की घटनाओं को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का 10 सदस्यीय ‘कोर ग्रुप’ गठित किया है। यह कदम देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल में वर्ष 2025 में पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक आत्महत्या के मामले (59) सामने आने के बाद उठाया गया है।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस समूह की अध्यक्षता सीआरपीएफ महानिदेशक (डीजी) करेंगे और यह हर महीने बैठक कर ऐसी घटनाओं की ‘विस्तृत समीक्षा’ करेगा।

इस महीने की शुरुआत में ‘पीटीआई भाषा’ की खबर में बताए गए सरकारी आंकड़ों का हवाला देने वाले सूत्रों के अनुसार, करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले सीआरपीएफ में वर्ष 2025 में 59 जवानों ने आत्महत्या की, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है। इनमें 80 प्रतिशत से अधिक मामले कांस्टेबल स्तर के कर्मियों से जुड़े थे।

सूत्रों ने 2021-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 77 प्रतिशत से अधिक मामलों में कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान दी। कुल 262 मामलों में से 202 घटनाएं उस समय हुईं जब जवान ड्यूटी पर तैनात थे, जबकि बाकी घटनाएं तब हुईं जब जवान छुट्टी पर थे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 14 अगस्त को इन खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव और सीआरपीएफ महानिदेशक को नोटिस जारी किया था और दो सप्ताह के भीतर इस मामले में ‘विस्तृत रिपोर्ट’ मांगी थी।

अधिकारियों ने बताया कि नवगठित ‘कोर ग्रुप’ आत्महत्या से जुड़े प्रत्येक मामले की ‘निष्पक्ष तरीके से’ जांच करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक निवारक, कल्याणकारी, प्रशासनिक और चिकित्सकीय उपाय सुझाएगा।

उन्होंने कहा कि समूह समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगा, जवाबदेही तय करेगा और रोकथाम के उपायों को मजबूत करेगा, ताकि ऐसी घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ इन्हें पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

कई शब्दकोशों के अनुसार, ‘सेल्फ-हार्म’ (खुद को नुकसान पहुंचाना) जान-बूझकर की गई ऐसी हरकत है, जिससे जानलेवा या मामूली चोटें लग सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका इलाज उपलब्ध है।

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ कमांडिंग अधिकारी ने कहा कि लगातार तैनाती, परिवार से दूरी और कार्य-जीवन संतुलन जैसी समस्याएं कुछ ऐसी ‘बुनियादी वजहें’ हैं, जिनपर आत्महत्या की समस्या का समाधान ढूंढ़ते समय ध्यना देना जरूरी है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में सीआरपीएफ के 59 कर्मियों ने खुदकुशी की जबकि यह आंकड़ा 2024 में 46, 2023 में 57, 2022 में 43 और 2021 में 57 था।

भाषा

शुभम संतोष

संतोष


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