सीयूईटी से दिल्ली विश्वविद्यालय में बढ़ी है विविधता : कुलपति योगेश सिंह
सीयूईटी से दिल्ली विश्वविद्यालय में बढ़ी है विविधता : कुलपति योगेश सिंह
(अहेली दास)
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) दाखिला सत्र करीब आने के बीच, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने सीयूईटी के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इसने विभिन्न बोर्ड, राज्यों और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को आकर्षित करके विविधता को बढ़ावा दिया है।
सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षा प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) ने विभिन्न शिक्षा बोर्ड और क्षेत्रों के छात्रों के लिए ‘‘समान अवसर’’ प्रदान किए हैं। सिंह ने कहा, ‘‘यह प्रणाली पिछली प्रणाली से निश्चित रूप से बेहतर है। सीयूईटी सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पहले विश्वविद्यालय में प्रवेश कुछ ही बोर्ड से केंद्रित होते थे, क्योंकि विभिन्न बोर्ड द्वारा अंक देने के तरीकों में एकरूपता नहीं थी। कुलपति के अनुसार, सीयूईटी ने प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब हमें लगभग सभी राज्यों से, बड़े, छोटे शहरों से और गांवों से भी छात्र मिल रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय ‘मिनी इंडिया’ है, इसलिए हम इसके पक्ष में हैं।’’
सिंह की ये टिप्पणियां नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक को लेकर विवाद के बीच आई हैं, जिसने केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं पर बहस को फिर से हवा दे दी है।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर उठ रही चिंताओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रबंधन से संबंधित मुद्दों का समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सीयूईटी ने विभिन्न पृष्ठभूमियों से ‘‘बेहद मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रों’ को लाकर विश्वविद्यालयों को लाभ पहुंचाया है।
कुलपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत शुरू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के बारे में भी बात की, जिसका पहला बैच आने वाले महीनों में स्नातक होने वाला है।
सिंह ने कहा, ‘‘इस बार लगभग 25,000 छात्र चौथे वर्ष में हैं। हम पहले वर्ष में लगभग 70,000 छात्रों को प्रवेश देते हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।
एनईपी के तहत, स्नातक स्तर के वे छात्र जिन्होंने छह सेमेस्टर पूरे कर लिए हैं, तीन वर्षीय डिग्री के साथ पाठ्यक्रम छोड़ने के पात्र हैं। कुलपति के अनुसार, पहले समूह के लगभग 45,000 छात्रों ने इस विकल्प का लाभ उठाया।
उन्होंने कहा कि चौथे वर्ष के छात्र उद्यमिता, अनुसंधान परियोजनाओं और संपर्क गतिविधियों सहित कई विकल्पों में से चुनाव कर सकते हैं।
सिंह ने स्वीकार किया कि नए स्नातक ढांचे को लागू करने में बुनियादी ढांचे से संबंधित चुनौतियां आई हैं, खासकर इसलिए क्योंकि कॉलेज पारंपरिक रूप से शिक्षण-शिक्षण प्रक्रियाओं के लिए तैयार किए गए थे, न कि अनुसंधान और नवाचार के लिए।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब, हम हर कॉलेज से अनुसंधान, रचनात्मकता, मौलिकता और उद्यमिता को बढ़ावा देने की अपेक्षा करते हैं।’’ कुलपति ने कहा कि सभी कॉलेजों के शिक्षक इस बदलाव का समर्थन कर रहे हैं।
कुलपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के बढ़ते ध्यान पर भी प्रकाश डाला। सिंह ने कहा, ‘‘हमारे यहां एआई पर कई पाठ्यक्रम हैं, जिनमें ‘सभी के लिए एआई’ भी शामिल है, और प्रौद्योगिकी संकाय के तहत हम एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस में लघु पाठ्यक्रम भी प्रदान कर रहे हैं।’’
भाषा आशीष प्रशांत
प्रशांत

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