पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात का सीएसएल के जहाज निर्माण उद्योग पर फिलहाल कोई असर नहीं: अधिकारी

पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात का सीएसएल के जहाज निर्माण उद्योग पर फिलहाल कोई असर नहीं: अधिकारी

पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात का सीएसएल के जहाज निर्माण उद्योग पर फिलहाल कोई असर नहीं: अधिकारी
Modified Date: March 13, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: March 13, 2026 3:56 pm IST

(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)

कोच्चि (केरल), 13 मार्च (भाषा) देश की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में जहाज निर्माण उद्योग पर पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात का फिलहाल कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन यदि एक साल से अधिक समय तक ऐसी ही परिस्थितियां बनी रहीं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका दुष्प्रभाव पड़ा तो उस पर भी असर दिख सकता है।

केरल के बंदरगाह शहर कोच्चि में स्थित देश की प्रमुख जहाज निर्माण और मरम्मत कंपनी सीएसएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही।

मध्यप्रदेश से केरल के दौरे पर गए पत्रकारों के एक समूह से बातचीत के दौरान कंपनी के जहाज निर्माण उद्योग पर पश्चिम एशिया संकट के संभावित असर के बारे में ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा, ‘इस प्रकार का वैश्विक तनाव हमारे जहाज उत्पादन उद्योग को प्रभावित नहीं करता।’

उन्होंने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि इसकी वजह एडवांस में ‘ऑर्डर’ मिलना और कच्चे माल के लिए विदेश पर कम निर्भरता है।

साथ ही उन्होंने कहा कि एक और वजह यह है कि कंपनी के निर्माण का एक बड़ा हिस्सा भारतीय नौसेना की घरेलू रक्षा परियोजनाओं में काम आता है।

उन्होंने कहा, ‘ऑर्डर देने के साथ ही वे (कंपनियां) कुछ अग्रिम भुगतान भी करते हैं और फिर हम एक तय समयसीमा के मुताबिक जहाजों का निर्माण करते हैं। इसलिए हमारे उद्योग पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।’

अधिकारी ने कहा, ‘लेकिन अगर यह संघर्ष एक साल से ज्यादा समय तक जारी रहता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है तब संभवतः हमें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।’

ईरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए इजराइल के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिका के विभिन्न ठिकानों पर भी ड्रोन और मिसाइल दाग रहा है जबकि इजराइल और अमेरिका भी ईरान पर हमले कर रहे हैं।

ईरान की ओर से लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने से अमेरिका और उसके सहयोगियों-खासकर इजराइल और खाड़ी देशों-के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले लंबे समय तक जारी रहे तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

सीएसएल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के इस उद्यम के पास 21,000 करोड़ रुपये मूल्य के जहाज निर्माण के ऑर्डर हैं, जिसमें 1,500 करोड़ रुपये के जहाज मरम्मत के ऑर्डर भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि कुल 75 जहाजों के निर्माण का ऑर्डर है जिनमें 13,700 करोड़ रुपये मूल्य के 14 रक्षा (घरेलू) जहाज, 1700 करोड़ रुपये मूल्य के 34 वाणिज्यिक (घरेलू) जहाज और 4200 करोड़ रुपये मूल्य के 27 वाणिज्यिक (निर्यात) जहाज शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया कि कुल ऑर्डर में से 65 प्रतिशत घरेलू रक्षा क्षेत्र से, 20 प्रतिशत वाणिज्यिक निर्यात से, आठ प्रतिशत वाणिज्यिक घरेलू क्षेत्र से और 7 प्रतिशत जहाज मरम्मत से संबंधित हैं।

बुक ऑर्डर के निष्पादन की स्थिति के बारे में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 75 जहाजों में से 13 का निर्माण उन्नत (एडवांस) जबकि 25 डिजाइन एवं इंजीनियरिंग के चरण में हैं। उन्होंने बताया कि 37 जहाज निर्माण के शुरुआती चरण में हैं।

उन्होंने बताया कि कंपनी के पास कुल 2,85,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर आने की प्रक्रिया में हैं, जिसमें 70 प्रतिशत यानी 2,20,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर रक्षा क्षेत्र के हैं और 23 प्रतिशत यानी 6500 करोड़ रुपये वाणिज्यिक हैं।

अधिकारी ने बताया कि अगले छह महीने में सीएसएल को नॉर्वे और साइप्रस समेत यूरोप के कुछ देशों को जहाज की डिलीवरी करनी है। हालांकि उन्होंने इनकी संख्या नहीं बताई।

अधिकारी ने कंपनी को मिले कुछ प्रमुख ऑर्डर के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सीएसएल ने फरवरी महीने में वैश्विक पोत परिवहन कंपनी सीएमए सीजीएम के साथ छह 1,700 टीईयू एलएनजी-ईंधन वाले फीडर कंटेनर जहाजों के निर्माण के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा कंपनी को रक्षा मंत्रालय से भारतीय नौसेना के लिए पांच आधुनिक सर्वेक्षण जहाज बनाने का ठेका मिला है।

उन्होंने कहा कि इस ऑर्डर की अनुमानित कुल कीमत लगभग 5000 करोड़ रुपये है।

अधिकारी ने बताया कि सीएसएल पहले ही भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन कर चुकी है और अब वह हरित ऊर्जा आधारित जहाजों के निर्माण के माध्यम से समुद्री उद्योग को नयी दिशा देने में जुटा है।

भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब

जोहेब


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