Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर जलदान से खुलते हैं मोक्ष के द्वार, लेकिन पानी से जुड़ी एक गलती कर सकती है सब बर्बाद! जानें कब है ये व्रत
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है जो ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में 25 जून को आती है। इस दिन जलदान को महादान कहा गया है और इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा और सभी एकादशियों का फल देता है।
(Nirjala Ekadashi 2026/ Image Credit: AI-generated)
- निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
- जलदान को इस दिन महादान और अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है।
- जरूरतमंदों और पशु-पक्षियों को पानी पिलाना विशेष फलदायी है।
नई दिल्ली: Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी को सभी एकादशी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ और अधिक पुण्य देने वाला माना जाता है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 25 जून को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है और भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।
जलदान का धार्मिक महत्व
इस दिन जलदान का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह व्रत भीषण गर्मी के समय आता है। धर्मशास्त्रों में प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। जलदान को महादान कहा गया है क्योंकि जल जीवन का आधार है। इस दिन जरूरतमंद लोगों, राहगीरों, पशु-पक्षियों को पानी पिलाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और माना जाता है कि इससे देवताओं और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है।
जलदान की परंपरा
निर्जला एकादशी पर कई जगहों पर प्याऊ लगाने और जल वितरण की परंपरा भी देखी जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन जल का दान करता है उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं और उसका जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। जलदान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज सेवा का भी एक सुंदर रूप माना जाता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार सावधानियां
वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन जल का विशेष सम्मान करना चाहिए। घर में टूटे हुए बर्तन, खाली घड़े, गंदे पानी वाले कंटेनर या अनुपयोगी जल पात्र रखना अशुभ माना जाता है। इन्हें घर से बाहर कर देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसे सामान घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन पानी की बर्बादी से भी बचना चाहिए।
जल तत्व और चंद्रमा का संबंध
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में जल तत्व को शुद्धता, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। जल का संबंध चंद्रमा से जोड़ा जाता है जो मन और भावनाओं का कारक है। इसलिए जल की स्वच्छता और उसका सम्मान मानसिक शांति और संतुलन के लिए भी जरूरी माना गया है। निर्जला एकादशी पर जल का आदर करने से जीवन में शुभ प्रभाव बढ़ता है।
इन्हें भी पढ़ें:
- Petrol Diesel Purchase New Rules: वाहन चालकों के लिए बड़ा बदलाव! पेट्रोल-डीजल खरीद पर सरकार का नया नियम, जानिए अब कितनी मात्रा में मिलेगा फ्यूल
- SBI Share Price: रिकॉर्ड हाई से नीचे आया SBI का शेयर, लेकिन गिरावट के बीच जेफरीज का बड़ा दांव, 1300 रुपये तक जा सकता है स्टॉक
- Kanpur Police Transfer Controversy: जूनियर बना टीआई तो सीनियर इंस्पेक्टर ने कर दिया बड़ा कांड, कहा- मैं जूनियर का आदेश कैसे मानूंगा? पुलिस विभाग में हड़कंप

Facebook


