बाल विवाह के खिलाफ 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होना असम के कदमों की पुष्टि: हिमंत

बाल विवाह के खिलाफ 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होना असम के कदमों की पुष्टि: हिमंत

बाल विवाह के खिलाफ 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होना असम के कदमों की पुष्टि: हिमंत
Modified Date: September 5, 2026 / 07:47 pm IST
Published Date: September 5, 2026 7:47 pm IST

गुवाहाटी, पांच सितंबर (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह और जबरन विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने का शनिवार को स्वागत किया और कहा कि यह फैसला नाबालिगों की शादी के खिलाफ असम सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों की पुष्टि करता है।

शर्मा ने यह भी कहा कि इस तारीख को तय करना बाल विवाह और जबरन विवाह के खिलाफ असम सरकार के ‘बिना किसी समझौते वाले अभियान’ की घोषणा के साथ मेल खाता है, जिसके तहत सरकार इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखे हुए है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र अब उस बात से सहमत है, जिसे हम असम में अपने पिछले कार्यकाल से कहते आ रहे हैं। बाल विवाह या जबरन विवाह का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित करने से इस बुराई को खत्म करने में वैश्विक स्तर पर मदद मिलेगी। उन्होंने पोस्ट के साथ संयुक्त राष्ट्र की घोषणा की एक प्रति भी साझा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस बुराई के खिलाफ राज्य सरकार की कोशिशों के चलते 12,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, 11,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और 20 जिलों में बाल विवाह में 81 प्रतिशत की कमी आई; साथ ही, कम उम्र में गर्भवती होने के मामलों में भारी कमी आई और उच्च शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘संयोग से हमने पहले ही घोषणा कर दी थी कि नवंबर महीने में बाल और जबरन विवाह के खिलाफ बिना किसी समझौते वाला अभियान चलाया जाएगा और सभी दोषियों को कानून के दायरे में लाकर हमारी बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा।’’

शर्मा ने कहा, ‘‘बाल विवाह के खिलाफ असम की लड़ाई ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई चर्चा शुरू की और अब इसे वैश्विक मान्यता मिली है। हमारी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम है, बाल विवाह से मुक्त समाज बनाना।’’

भाषा शुभम सुरेश

सुरेश


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