रिफाइनरी परियोजना में देरी वर्षों की निष्क्रियता और कुप्रबंधन का परिणाम: गहलोत

रिफाइनरी परियोजना में देरी वर्षों की निष्क्रियता और कुप्रबंधन का परिणाम: गहलोत

रिफाइनरी परियोजना में देरी वर्षों की निष्क्रियता और कुप्रबंधन का परिणाम: गहलोत
Modified Date: April 12, 2026 / 10:38 pm IST
Published Date: April 12, 2026 10:38 pm IST

जयपुर, 12 अप्रैल (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान रिफाइनरी परियोजना में हो रही देरी पर रविवार को सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह वर्षों की निष्क्रियता और कुप्रबंधन का परिणाम है।

गहलोत ने कहा, “यदि इतनी बड़ी परियोजना कई वर्षों तक अटकी रहती है तो लागत बढ़ना तय है। लागत लगभग 37,000 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ता है। इस देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से 2018 तक भाजपा सरकार के दौरान परियोजना ठप रही और केवल चुनावों से पहले इसे फिर से शुरू किया गया।

गहलोत ने कहा, “असली लाभ तभी मिलेगा जब राजस्थान के युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। अन्यथा बाहरी कंपनियां कब्जा कर लेंगी और राज्य को केवल कर राजस्व ही मिलेगा।”

गहलोत ने राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएसएस) पर भी चिंता जताई और भुगतान में देरी का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अस्पताल में इलाज रोका जा रहा है और मेडिकल स्टोर दवाइयां देने से मना कर रहे हैं क्योंकि बकाया भुगतान लंबित है। लोग मजबूर होकर अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।”

भाषा बाकोलिया जोहेब

जोहेब


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