दिल्ली : एसआईआर के तहत 47.7 लाख मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में जगह नहीं मिली
दिल्ली : एसआईआर के तहत 47.7 लाख मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में जगह नहीं मिली
नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद तैयार की गई मसौदा मतदाता सूची सोमवार को प्रकाशित की जा सकती है। पूर्व में दर्ज 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.7 लाख मतदाताओं को मसौदा सूची में जगह नहीं मिली है।
अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को प्रकाशित होगी।
अधिकारियों ने बताया कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए लोग 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावे और आपत्तियां दाखिल कर अपना नाम शामिल करवा सकते हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मसौदा मतदाता सूची में लगभग 97.5 लाख मतदाताओं को जगह मिली है। यह संख्या दिल्ली के कुल 1,45,10,299 मतदाताओं का 67.18 प्रतिशत है। इन मतदाताओं के गणना प्रपत्र घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की मुहिम के दौरान जमा और डिजिटलीकरण किये गए थे। यह मुहिम 17 अगस्त को खत्म हुई थी।
अधिकारियों ने बताया कि बाकी 47.7 लाख मतदाताओं को ‘संपर्क नहीं किया जा सका’ माना गया है और उन्हें ‘‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, नाम में दोहराव और अन्य’’ (एएसडीडीओ) श्रेणी में रखा गया है। इन मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा लेकिन ये 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावे और आपत्तियां दर्ज करके अपना नाम सूची में शामिल करवा सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही सत्यापन का अगला चरण भी शुरू हो जाएगा। जिन मतदाताओं के नाम सूची में हैं, उनमें से कुछ को नोटिस मिल सकता है अगर उनकी जानकारी 2002 की एसआईआर सूची से नहीं जुड़ पाई या उनके गणना प्रपत्र में कोई गड़बड़ी पाई गई।
दिल्ली के सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी गड़बड़ियों में मौजूदा मतदाता सूची और 2002 की मतदाता सूची में मतदाताओं के नाम का मेल न खाना, मतदाता और उनके माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से अधिक का अंतर, या भाई-बहनों की जन्म तारीखों के बीच नौ महीने से कम का अंतर शामिल हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अगर किसी मतदाता की उम्र या नागरिकता को लेकर कोई आशंका हो, तो मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अतिरिक्त दस्तावेज़ मांग सकते हैं। पात्रता साबित करने के लिए केवल आधार पर्याप्त नहीं होगा।
दस्तावेजों से जुड़ी ज़रूरतें मतदाता की जन्म-तिथि के आधार पर भी अलग-अलग होंगी।
अधिकारियों ने बताया कि एक जुलाई 1987 से पहले भारत में जन्मे लोगों को अपनी जन्म-तिथि और/या जन्म-स्थान साबित करने वाले दस्तावेज की ज़रूरत होगी। एक जुलाई 1987 और 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपने और अपने माता-पिता में से किसी एक के दस्तावेजों की जरूरत होगी जबकि दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोगों को अपने और अपने माता-पिता, दोनों के दस्तावेजों की जरूरत होगी।
सीईओ कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के सूची से नाम हटने का प्रतिशत अलग-अलग है। रोहिणी गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में शीर्ष पर है और यहां यह कार्य 83.43 प्रतिशत रहा, जबकि तुगलकाबाद में यह सबसे कम 52.15 प्रतिशत है।
अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में, ओखला में 3,62,813 में से 1,64,435 गणना प्रपत्र 45.32 प्रतिशत को ‘एकत्र नहीं हो पाया’ श्रेणी में दर्ज किया गया है।
चांदनी चौक में 38.98 प्रतिशत, बल्लीमारान में 32.65 प्रतिशत, मुस्तफाबाद में 28.09 प्रतिशत, बाबरपुर में 27 प्रतिशत, मटिया महल में 24.50 प्रतिशत और सीलमपुर में 23.37 प्रतिशत मतदाताओं के नाम प्रपत्र ‘एकत्र नहीं पाया’श्रेणी में डाला गया है।
बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने पहले शाहीन बाग और जसोला विहार जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी परिवारों को 2002 की मतदाता सूची से जोड़ने में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया था।
दूसरी ओर, कई निर्वाचन क्षेत्रों में डिजटलीकरण अपेक्षाकृत अधिक रहा। शकूरबस्ती में यह 81.26 प्रतिशत, राजौरी गार्डन में 79.14 प्रतिशत, मंगोलपुरी में 78.76 प्रतिशत और उत्तम नगर में 77.76 प्रतिशत रहा।
अल्पसंख्यक-बहुल सीटों में सीलमपुर में 76.63 प्रतिशत, मटिया महल में 75.50 प्रतिशत, बाबरपुर में 73 प्रतिशत, मुस्तफाबाद में 71.91 प्रतिशत और बल्लीमारान में 67.35 प्रतिशत डिजिटलीकरण दर्ज किया गया, जबकि चांदनी चौक में यह आंकड़ा 61.02 प्रतिशत रहा।
एसआईआर प्रक्रिया के कारण दिल्ली के मतदान केंद्रों के नेटवर्क में भी बदलाव आए हैं। मतदाता केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है, जबकि मतदान स्थलों की संख्या 2,696 से बढ़कर 2,856 हो गई है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश

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