दिल्ली इमारत हादसा : घटना को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे जीवित बचे लोग

दिल्ली इमारत हादसा : घटना को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे जीवित बचे लोग

दिल्ली इमारत हादसा : घटना को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे जीवित बचे लोग
Modified Date: September 8, 2026 / 07:12 pm IST
Published Date: September 8, 2026 7:12 pm IST

(सौम्या शुक्ला)

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत हादसे में जीवित बचे लोग इस घटना को स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं।

कोई अपने उन दोस्तों को खोने के गम में है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, तो कोई जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।

रविवार दोपहर दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास वाली दशकों पुरानी इमारत ढह गई थी।

इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य लोग घायल हुए।

बचाए गए लोगों में 19 वर्षीय नीरज बावा भी शामिल है। वह मोतीलाल नेहरू कॉलेज में कला स्नातक (बीए) द्वितीय वर्ष का छात्र है और गंभीर हालत में अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में भर्ती हैं।

हादसे में उसके शरीर के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं।

उसके दोस्त और हादसे में जीवित बचा 19 वर्षीय नीतीश चिब उसी कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। वह चोटों से उबर रहा है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है।

लेकिन नीतीश को यह जानकारी नहीं है कि नीरज अब भी आईसीयू में भर्ती हैं। उसे यह भी नहीं पता कि पीजी में उसके साथ रहने वाले कुछ लोगों की इमारत गिरने से मौत हो गई है।

नीतीश की मां सीमा चिब ने बताया कि उनका बेटा अपने दोस्त के बारे में पूछ रहा है लेकिन परिवार ने उसे अब तक हादसे की पूरी भयावहता के बारे में नहीं बताया है।

हादसे के समय नीतीश और नीरज दोपहर का खाना खा रहे थे, तभी उन्हें अचानक तेज झटका महसूस हुआ और कुछ ही पलों में पूरी इमारत भरभराकर गिर गई।

इमारत के ढहने से उसमें रहने वाले लोग मलबे के भारी ढेर के नीचे दब गए।

सीमा चिब ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “वह (नीतीश) अब ठीक है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी, लेकिन मैं नीरज के भी ठीक होने का इंतजार करूंगी। दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं और वह लगातार मुझसे नीरज के बारे में पूछता रहता है। हालांकि, हमने उसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से नहीं बताया है। वह अभी ठीक हो रहा है और इस समय उसे इस सदमे से बचाना जरूरी है।”

उन्होंने कहा, “मैं प्रार्थना करती हूं कि मेरे बेटे की तरह बाकी सभी लोग भी जल्द स्वस्थ हो जाएं और फिर कभी किसी के साथ ऐसी घटना न हो।”

नीरज के बड़े चचेरे भाई अशोक कुमार ने बताया कि परिवार ने भी फैसला किया है कि नीरज के ठीक होने तक उसे इस हादसे की पूरी भयावहता के बारे में जानकारी नहीं दी जाएगी।

कुमार ने कहा, “वह अभी इस सदमे को सहन नहीं कर पाएगा। इस समय उसका पूरा ध्यान ठीक होने पर होना चाहिए।”

सत्य निकेतन इमारत हादसे के घटनास्थल पर 27 घंटे से अधिक समय तक चला बचाव अभियान सोमवार शाम समाप्त हुआ।

पुलिस ने इमारत के मालिक 81 वर्षीय हरिराम, उनकी 75 वर्षीय पत्नी उर्मिला और 52 वर्षीय बेटे महेश को गिरफ्तार किया है। हरिराम, भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त सार्जेंट हैं।

तीनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भाषा जितेंद्र अविनाश

अविनाश


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