दिल्ली: अदालत ने महिला से छेड़छाड़ के आरोपी दो लोगों को बरी किया

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दिल्ली: अदालत ने महिला से छेड़छाड़ के आरोपी दो लोगों को बरी किया

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 05:48 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2014 में एक महिला से छेड़छाड़ और उसकी पिटाई करने के आरोपी दो लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा और शिकायतकर्ता के बयान में विरोधाभास पाए गए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यादवेंद्र सिंह आरोपी पर्याग दीप और रुद्र दीप के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे।

दोनों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 341 (गलत तरीके से रोकना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354बी (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या बल प्रयोग) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप थे।

अदालत ने नौ जून को दिए आदेश में कहा, “अदालत का निष्कर्ष है कि अभियोजन पक्ष विश्वास बनाने में नाकाम रहा क्योंकि अभियोजन आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने में असफल रहा।”

यह मामला 26 मार्च 2014 को पश्चिमी दिल्ली के रनहोला इलाके में हुई एक घटना से जुड़ा था।

एक महिला ने आरोप लगाया था कि दोनों आरोपी उसके रिश्तेदार हैं, घर लौटते समय उन्होंने उसे रास्ते में रोककर पीटा, गलत तरीके से छुआ, उसके कपड़े फाड़ दिए और जान से मारने की धमकी दी।

अदालत ने कहा कि आमतौर पर किसी घायल गवाह की गवाही का काफी महत्व होता है लेकिन जब ऐसे महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आएं जो अभियोजन पक्ष के मामले की बुनियाद को प्रभावित करते हों, तो ऐसी गवाही को बिना जांचे-परखे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश ने कहा, “जब शिकायतकर्ता की गवाही अविश्वसनीय हो जाए और अभियोजन पक्ष किसी भी पुष्टि करने वाले सबूत के माध्यम से आरोपियों की मौजूदगी और कथित कृत्य को साबित न कर सके, तो मेरे विचार में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।”

न्यायाधीश ने कहा कि शिकायतकर्ता का दावा था कि उसने चिकित्सकों को कथित छेड़छाड़ की जानकारी दी थी लेकिन उसके मेडिकल रिकॉर्ड में केवल “कथित हमले का इतिहास” दर्ज था।

अदालत ने यह भी कहा कि कथित घटना एक घनी आबादी वाले इलाके में हुई थी, जहां आसपास दुकानें भी थीं, इसके बावजूद आरोपों की पुष्टि के लिए किसी गवाह को पेश नहीं किया गया।

अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

भाषा जितेंद्र मनीषा

मनीषा