दिल्ली की अदालत ने 2016 के हत्या के मामले में दो लोगों को बरी किया
दिल्ली की अदालत ने 2016 के हत्या के मामले में दो लोगों को बरी किया
नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2016 में अपने सहकर्मी की हत्या के आरोपी दो लोगों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला ‘‘गहरे संदेह’’ पर आधारित था और उनके अपराध को साबित करने के लिए कोई भरोसेमंद और ठोस सबूत नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरविंदर सिंह उन दो लोगों के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिन पर 10 साल पहले मंडोली जेल के पास चाकू मारकर एक व्यक्ति की हत्या करने का आरोप था।
अदालत ने 25 अगस्त के आदेश में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष का मामला आरोपियों के खिलाफ गहरे संदेह के दायरे में ही रहा है कि वे मौत के लिए जिम्मेदार थे। यह स्थापित कानून है कि मन में यकीन चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह भरोसेमंद और ठोस सबूतों पर आधारित कानूनी यकीन की जगह नहीं ले सकता।’’
अदालत शाहनवाज की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसे कथित तौर पर 28 अक्टूबर 2016 को चाकू मारा गया था।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि नदीम और मृतक के बीच एक महिला को लेकर हुए झगड़े के बाद अजीम और नदीम ने शाहनवाज की हत्या की साजिश रची थी। अभियोजन ने जीटीबी अस्पताल ले जाते समय शाहनवाज द्वारा मरने से पहले एक एम्बुलेंस अधिकारी को दिए गए कथित मौखिक बयान पर भी भरोसा किया।
हालांकि, अदालत को मौत से पहले के कथित मौखिक बयान पर भरोसा नहीं किया। अदालत ने गौर किया कि एम्बुलेंस अधिकारी, जो अभियोजन पक्ष का मुख्य गवाह था, ने डॉक्टरों, ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल, पुलिस या मृतक के परिवार को इस कथित खुलासे के बारे में नहीं बताया था और उसका बयान घटना के लगभग एक महीने बाद जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किया गया था।
न्यायाधीश ने कहा कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, हत्या में इस्तेमाल किया गया कथित हथियार कभी बरामद नहीं हुआ और फोरेंसिक जांच ने आरोपियों को मौत से नहीं जोड़ा।
भाषा शफीक वैभव
वैभव

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