एपीटीईएल मामले में फडणवीस का पत्र पाखंड से भरा कदम है: कांग्रेस

एपीटीईएल मामले में फडणवीस का पत्र पाखंड से भरा कदम है: कांग्रेस

एपीटीईएल मामले में फडणवीस का पत्र पाखंड से भरा कदम है: कांग्रेस
Modified Date: August 26, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: August 26, 2026 4:27 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कथित तौर पर लिखा वह पत्र ‘‘पाखंड से भरा कदम’’ है, जिसमें उन्होंने अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) पर निजी बिजली कंपनियों के पक्ष में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि फडणवीस को उन फैसलों पर भी सवाल उठाना चाहिए जिनसे अडाणी समूह को लाभ हुआ है।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री से शिकायत की है कि अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) निजी बिजली कंपनियों के पक्ष में ‘‘भारी पक्षपात’’ कर रहा है।

रमेश का कहना था, ‘‘2025 और 2026 में महाराष्ट्र में एपीटीईएल की मेहरबानियों का सबसे बड़ा लाभार्थी मोडानी समूह रहा है। कम से कम चार मामलों में उसके पक्ष में फैसला किया गया है।’’

कांग्रेस ‘मोडानी’ शब्द का इस्तेमाल अडाणी समूह और मोदी सरकार के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाने के लिए करती है।

रमेश ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने न केवल बिजली परियोजनाओं में बल्कि धारावी जैसी रियल एस्टेट विकास परियोजनाओं में भी ‘मोडानी’ को लाभ पहुंचाने के लिए हरसंभव कोशिश की है।

उन्होंने दावा किया, ‘‘मोडानी के प्रति मुख्यमंत्री का अचानक गुस्सा पाखंड से भरा कदम है। प्रधानमंत्री को उनकी शिकायत किसी अन्य निजी कंपनी, जेएसडब्ल्यू के पक्ष में एपीटीईएल के एक फैसले से प्रेरित लगती है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री अपनी बात को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें उन सभी पिछले फैसलों पर सवाल उठाना चाहिए, जिनसे राज्य सरकार और उपभोक्ताओं की कीमत पर मोडानी को फायदा हुआ है।’’

उनकी यह टिप्पणी मीडिया में उन खबरों के कुछ दिनों बाद आई है, जिनमें कहा गया था कि फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर बिजली क्षेत्र की शीर्ष अपीलीय संस्था के मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि एपीटीईएल के हालिया कई फैसले सरकारी स्वामित्व वाली बिजली कंपनियों के बजाय निजी बिजली कंपनियों के पक्ष में रहे हैं।

भाषा हक हक नरेश

नरेश


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