दिल्ली : आबकारी नीति मामले में अदालत ने कुछ अहम टिप्पणियां की

दिल्ली : आबकारी नीति मामले में अदालत ने कुछ अहम टिप्पणियां की

दिल्ली : आबकारी नीति मामले में अदालत ने कुछ अहम टिप्पणियां की
Modified Date: February 27, 2026 / 05:17 pm IST
Published Date: February 27, 2026 5:17 pm IST

नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को आबकारी नीति मामले में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आरोप मुक्त करते हुए निम्नलिखित प्रमुख टिप्पणियां कीं :-

* केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच में खरा नहीं उतर सका और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ है।

* किसी भी स्वीकार्य साक्ष्य के अभाव में अभियोजन पक्ष का मामला कानूनी रूप से कमजोर, अस्थिर और विधि की दृष्टि से आगे बढ़ने के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।

* साक्ष्य से यह सिद्ध होता है कि यह नीति संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श और परामर्श के बाद तथा कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई थी।

* किसी दोषपूर्ण नीति या स्पष्ट रूप से गैरकानूनी कार्यान्वयन के अभाव में, अभियोजन का सिद्धांत केवल अनुमान मात्र रह जाता है।

* संबंधित संस्थाओं से जुड़े प्रतिबंधों या किसी अन्य नीतिगत शर्त का कोई स्पष्ट उल्लंघन नहीं पाया गया, जिससे आपराधिक मामला बन सकता था।

* प्रस्तुत दस्तावेजों से प्रतीत होता है कि कि जांच के दौरान अलग-अलग टुकड़ों को एक साथ जोड़कर एक विशाल और जटिल साजिश का आभास पैदा करने का प्रयास किया गया, जो कानूनी रूप से मान्य सामग्री द्वारा समर्थित नहीं है।

* ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एक पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी है, जिसमें नीति के निर्माण या कार्यान्वयन से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को अरोपित किया गया है ताकि कमजोर कहानी को गहराई और विश्वसनीयता का भ्रम दिया जा सके।

* इस तरह के आरोपों को गोवा विधानसभा चुनावों से जोड़कर, कथित अपराध की आय के हेरफेर और उपयोग को दर्शाने का प्रयास, कानूनी रूप से मान्य सामग्री की तुलना में अनुमानों पर अधिक आधारित है।

* अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र में मामला काफी हद तक अनुमानों, अटकलों और ठोस सबूतों के अभाव में किए गए निष्कर्षों पर आधारित है।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


लेखक के बारे में