नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने संजय गांधी पशु देखभाल केंद्र को एक जांच के दौरान कब्जे में लिए गए 10 कुत्तों को सौंपने के न्यायिक आदेश का अनुपालन नहीं करने पर फटकार लगाई।
अदालत ने कहा कि केंद्र द्वारा इस मामले में दी गई सफाई ‘‘पूरी तरह से असंतोषजनक’’ और ‘‘टालमटोल’’ करने वाली है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरभि शर्मा वत्स जगतपुरी थाने में दर्ज प्राथमिकी में आरोपी मालिक को कुत्ते सौंपने के निर्देश देने वाले मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए पशु आश्रय की ओर से दाखिल आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।
अदालत ने 13 जनवरी के आदेश में कहा, ‘‘उपरोक्त तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट होता है कि याचिकाकर्ता (पशु आश्रय केंद्र) का आचरण घोर गैर-अनुपालन, गंभीर लापरवाही और जानबूझकर गलतबयानी वाला है, जबकि वे पशु कल्याण के लिए कार्य करने का दावा करते हैं। उनके कार्यों से जीवन खतरे में पड़ता है और वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन होता है।’’
इसने फैसले में कहा कि संजय गांधी पशु देखभाल केंद्र जानवरों का संरक्षक नहीं है, बल्कि केवल नाममात्र देखरेख करने वाला है और कुत्तों को उसके पास रखे जाने से इन निर्दोष, असहाय जानवरों के लिए खतरा ही बढ़ेगा।
अदालत ने कहा कि जानवर, पक्षी और जीवित प्राणी निर्जीव वस्तुएं, संपत्ति या निपटान योग्य वस्तुएं नहीं हैं तथा कानून के तहत जीवन, गरिमा और उचित देखभाल के हकदार हैं।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा पशु देखभाल केंद्र अगली सुनवाई की तारीख पर हलफनामा के माध्यम से एक विस्तृत, व्यापक वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करे, जिसमें कब्जे में लिए गए सभी जानवरों, मालिकों को लौटाए गए जानवरों, केंद्र में रखने के दौरान हुई मौतों (पशु चिकित्सा रिकॉर्ड सहित), गोद लेने या स्थानांतरण, प्रत्येक जानवर की वर्तमान स्थिति और स्थान, तथा पहचान और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रियाओं का विवरण दिया गया हो।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल