Haridwar Har Ki Pauri Controversy / Image Source : AI generated
हरिद्वार : उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में ‘हर की पौड़ी’ क्षेत्र को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे क्षेत्र में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध’ लिखे हुए पोस्टर चिपका दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि ये पोस्टर हर की पौड़ी की प्रबंधन संस्था ‘गंगा सभा’ की ओर से लगाए गए हैं।
इन पोस्टरों में क्षेत्र आज्ञा से “म्यूनिसिपल एक्ट हरिद्वार” के बारे में बताया गया है। गंगा सभा हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही है। उनका मानना है कि हर की पौड़ी सनातन धर्म का आस्था केंद्र है और यहां की शुद्धता व परंपराओं को बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। ( Haridwar Har Ki Pauri Controversy ) संस्था ने प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज का कड़ाई से पालन कराया जाए।
हरिद्वार में हर की पैड़ी के आसपास पोस्टर लगे – ”अहिन्दू प्रवेश निषेध क्षेत्र” pic.twitter.com/g8zCd1iPpZ
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) January 16, 2026
हरिद्वार की प्रमुख संस्था ‘गंगा सभा’ ने प्रशासन के सामने एक स्पष्ट और सख्त मांग रखी है। संस्था का कहना है कि हर की पौड़ी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आस्था का सर्वोच्च केंद्र है, इसलिए यहाँ अहिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। (Ganga Sabha Demand) गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम के अनुसार, यह मांग गंगा की अस्मिता और धार्मिक परंपराओं की शुचिता को बनाए रखने के लिए है।संस्था ने प्रशासन से 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज को कड़ाई से लागू करने में सहयोग मांगा है।
1916 का म्युनिसिपल बायलॉज एक 110 साल पुराना नियम है जो ब्रिटिश सरकार और महामना मदन मोहन मालवीय के बीच हुए एक समझौते से निकला था। उस समय गंगा की अविरल धारा को बचाने के लिए हुए आंदोलन के बाद यह तय किया गया कि हरिद्वार की ‘हर की पौड़ी’ कोई साधारण जगह नहीं, बल्कि एक विशेष धार्मिक क्षेत्र है। (Non-Hindus Entry )इस नियम के तहत हर की पौड़ी और उसके आस-पास के करीब 3 किलोमीटर के दायरे में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और वहां रहने पर पाबंदी लगा दी गई थी। साथ ही, इस पवित्र क्षेत्र में मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल भी पूरी तरह वर्जित कर दिया गया।
गंगा सभा हरिद्वार की वो संस्था है जो ‘हर की पौड़ी’ की देखरेख करती है। इसकी शुरुआत 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी।( Haridwar News )उस समय अंग्रेजों ने जब गंगा की धारा को रोकने की कोशिश की, तो मालवीय जी ने इसी संस्था के जरिए बड़ा आंदोलन किया और अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर कर दिया। तब से लेकर आज तक, यानी पिछले 110 सालों से, यह संस्था हर की पौड़ी पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का इंतजाम करती है और वहां के नियमों का पालन करवाती है। यह हरिद्वार के पुजारियों का सबसे बड़ा संगठन है, जो गंगा की पवित्रता और हिंदू धर्म की परंपराओं को बचाने का काम करता है।