नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के एक पूर्व अधिकारी को जमानत दे दी है, जिस पर सरकारी धन को धोखाधड़ी से जारी करने में मदद करने का आरोप है, जिसके कारण सरकारी खजाने को लगभग 5.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।
विशेष न्यायाधीश रुचि अग्रवाल असरानी आरोपी अजीत सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।
अजीत के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) ने मामला दर्ज किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जीएसटी के तत्कालीन अधिकारी ने मार्च से अगस्त 2023 के बीच वैधानिक प्रावधानों और विभागीय सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करते हुए लगभग 5.50 करोड़ रुपये के 61 रिफंड आदेश जारी किए थे।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि विभागीय जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें बिना सत्यापन के यांत्रिक तरीके से रिफंड मंजूर करना, अनिवार्य वित्तीय मानकों का अभाव, फर्जी या कंप्यूटर से तैयार किए गए चालानों का उपयोग, कारोबारी परिसरों का सत्यापन न करना, 60 दिनों के बजाय केवल सात से 10 दिनों के भीतर रिफंड प्रक्रिया पूरी करना तथा बिना जांच-पड़ताल के कारोबारी परिसरों का बार-बार बदला जाना शामिल है।
जांच अधिकारी (आईओ) ने दावा किया कि रिफंड मंजूर करने में दिखाई गई असामान्य जल्दबाजी इस मामले में एक महत्वपूर्ण आपत्तिजनक परिस्थिति है और ‘जांच में यह सामने आया कि याचिकाकर्ता/आरोपी (सिंह) ने धन को फर्जी तरीके से जारी कराने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 5.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
अदालत ने 27 जून को दिये आदेश में कहा कि सिंह 28 मई से न्यायिक हिरासत में हैं, मामले से जुड़े सभी दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं, केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है और आरोपी से संबंधित जांच पूरी हो चुकी है।
अदालत ने कहा, “इन आरोपों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए भी यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि जमानत नियम है और उसे अस्वीकार करना अपवाद है। आरोपी को लगातार हिरासत में रखने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।”
अदालत ने कहा, “आरोपी के निर्दोष होने की धारणा बनी रहती है और उसे दंडात्मक उपाय के रूप में हिरासत में नहीं रखा जा सकता। ”
अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और जमानती बांड प्रस्तुत करने पर रिहा किया जाए।
जमानत की अन्य शर्तों में यह शामिल है कि सिंह देश छोड़कर नहीं जाएंगे, इस तरह का कोई अन्य अपराध नहीं करेंगे, किसी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे या उन्हें धमकाएंगे नहीं तथा नियमित रूप से अदालत में उपस्थित होंगे।
भाषा जितेंद्र दिलीप
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