Coaching Centre Firing Case: कोचिंग गोलीबारी केस में ‘खान सर’ को कोर्ट से मिली मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर इतने दिनों तक रोक बरकरार

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Coaching Centre Firing Case: अदालत ने खान सर को कोचिंग संस्थान गोलीबारी मामले में गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत को 3 जुलाई तक बढ़ा दिया।

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 03:21 PM IST

Coaching Centre Firing Case / Image Source : X

HIGHLIGHTS
  • कोर्ट ने फैसल खान उर्फ़ खान खान सर को दी बड़ी राहत।
  • कोर्ट ने कोचिंग सेंटर फायरिंग केस में गिरफ्तारी पर लगी रोक को रखा बरकरार।
  • कोर्ट में तीन जुलाई को इस मामले में फिर से सुनवाई करेगी।

Coaching Centre Firing Case: पटना: बिहार की एक अदालत ने ‘खान सर’ के नाम से लोकप्रिय शिक्षक फैसल खान को कोचिंग संस्थान गोलीबारी मामले में गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत को मंगलवार को तीन जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया। यह मामला जून की शुरुआत में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें ‘खान सर’ के कोचिंग संस्थान में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई थी। आरोप है कि इस दौरान उनके सुरक्षा गार्डों ने गोली चलाई थी। अदालत तीन जुलाई को न्यायिक हिरासत में रखे गए खान सर के दोनों सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी।

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में ‘खान सर’ को भी नामजद किया गया है। उन्होंने गिरफ्तारी से राहत के लिए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, (Coaching Centre Firing Case) जिस पर अदालत ने तीन जुलाई तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है।

रोशन आनंद के वकील ने कही ये बात

Coaching Centre Firing Case: खान सर के प्रतिद्वंद्वी रोशन आनंद के अधिवक्ता सत्यम झा ने सुनवाई के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘खान सर’ के दोनों गार्डों के शस्त्र लाइसेंस का ब्योरा मांगा। अदालत ने जांच एजेंसियों से विशेष रूप से एक सुरक्षा गार्ड को उत्तर प्रदेश से जारी शस्त्र लाइसेंस का विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई तीन जुलाई को होगी।’’ रोशन आनंद को हाल में जमानत मिली है। वह दो जून को ‘खान सर’ के कोचिंग संस्थान के बाहर हुई कथित तोड़फोड़ और पथराव की घटना से जुड़े आरोपियों में शामिल हैं। झा ने बताया कि मामले में तीन जुलाई को बहस होगी और तब तक ‘खान सर’ के खिलाफ ‘‘कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं’’ करने का अदालत का आदेश प्रभावी रहेगा।

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