कोटा, 30 जून (भाषा) बुनियादी ढांचा विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कोटा जिले में एक बाघ अभयारण्य के नीचे बनी भारत की पहली आठ-लेन वाली राजमार्ग सुरंग इस साल अगस्त में सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए आधिकारिक तौर पर खुलने जा रही है।
वर्तमान में इस सुरंग में हल्के वाहनों के साथ सुरक्षा परीक्षण किये जा रहे हैं।
सुरक्षा निरीक्षणों के पूरा होने के बाद दिल्ली-वडोदरा खंड पर राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (एमएचटीआर) के नीचे स्थित 4.9 किलोमीटर लंबी इस ‘ट्विन-ट्यूब’ (दोहरी) सुरंग को शुरुआत में कारों और आपातकालीन वाहनों के लिए खोला गया है।
अधिकारियों द्वारा सुरंग के भीतर सुरक्षा प्रणालियों और मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़े अतिरिक्त आकलन पूरे किए जाने के बाद ही भारी वाहनों और अन्य सभी यातायात को इसमें से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), कोटा के परियोजना निदेशक संदीप अग्रवाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा, ‘एमएचटीआर के नीचे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बनी इस आठ-लेन राजमार्ग सुरंग को अब सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए आधिकारिक तौर पर नहीं खोला गया है। फिलहाल, कार जैसे हल्के वाहनों के साथ केवल परीक्षण किये जा रहे हैं।’
उन्होंने बताया कि सुरंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि सुरंग के भीतर अन्य काम नियमित परीक्षण के साथ-साथ किए जा रहे हैं।
अग्रवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय के निर्देशों के बाद आगामी अगस्त में इस सुरंग को सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए आधिकारिक तौर पर खोले जाने की संभावना है।
एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा न डालने और वन पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने के लिए इस सुरंग का निर्माण पूरी तरह से बाघ अभयारण्य के नीचे किया गया है।
इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि जानवर राजमार्ग के यातायात से प्रभावित हुए बिना सुरंग के ऊपर स्वतंत्र रूप से घूम सकें, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ परिवहन बुनियादी ढांचे के एकीकरण का एक अनुकरणीय उदाहरण है।
इस सुरंग में दोहरी ट्यूब हैं, जिनमें से प्रत्येक में चार लेन का मार्ग है। इसके साथ ही यह किसी वन्यजीव अभयारण्य के नीचे से गुजरने वाली देश की पहली आठ लेन की सुरंग बन गई है। सुरक्षित और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए इसके निर्माण में विशेष अभियांत्रिकी तकनीकों का उपयोग किया गया है।
भाषा सुमित गोला नरेश
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