(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कथित नगा उग्रवादी मसासासोंग आओ को धनशोधन के एक मामले में जमानत दे दी, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने आदेश की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘जमानत मंजूर की जाती है।’’
इस आदेश की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है।
धनशोधन का यह मामला ‘नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड’ (इसाक-मुइवा गुट) (एनएससीएन-आईएम) की स्वयंभू ‘कैबिनेट मंत्री’ बताने वाली एलेमला जमीर की गिरफ़्तारी के बाद 2021 में दर्ज हुआ था। एनएससीएन-आईएम एक प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन है। जमीर की गिरफ़्तारी गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज एक मामले में हुई थी।
जमीर को 17 दिसंबर 2019 को दिल्ली हवाई अड्डे पर उस समय रोका गया, जब वह 72 लाख रुपये लेकर दीमापुर जाने वाली था।
यूएपीए मामले में, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने आओ और उग्रवादी संगठन के दूसरे सदस्यों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जमीर को जबरन वसूली का रैकेट चलाने, आतंकवाद की खातिर पैसे का लेन-देन करने और विध्वंसकारी गतिविधियां करने में मदद की।
आओ को 2022 में धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलओ) के तहत इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था।
उसे फरवरी 2020 में यूएपीए मामले में एनआईए) ने गिरफ़्तार किया था और वह अब भी हिरासत में है।
भाषा राजकुमार संतोष
संतोष