मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंकों से अगले कुछ महीनों में विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमाओं से मिली अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करने की उम्मीद है, क्योंकि त्योहारी मौसम में ऋण की मांग मजबूत रहने की संभावना है।
विशेष विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा योजना के तहत बैंकों ने 133 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं। भारतीय प्रवासियों से मिली मजबूत प्रतिक्रिया के बाद यह योजना निर्धारित समय से एक महीने पहले 31 अगस्त को बंद कर दी गई थी।
जैन ने यहां 13वें एसबीआई बैंकिंग एवं इकॉनमिक्स कॉन्क्लेव से इतर संवाददाताओं से कहा कि एफसीएनआर-बी के तहत धन आने के बाद आरबीआई ने बैंकों के साथ उनकी नकदी की स्थिति पर चर्चा के लिए बैठकें की हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले त्योहारी मौसम और ऋण की मजबूत मांग को देखते हुए बैंकों से अगले कुछ महीनों में एफसीएनआर-बी की नकदी का इस्तेमाल करने की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा कि आरबीआई बैंकों को जुटाई गई राशि को किसी खास क्षेत्र में लगाने का निर्देश नहीं दे रहा है।
डिप्टी गवर्नर ने कहा कि बैंक अपनी ऋण योजनाओं, प्रस्तावों और नकदी की स्थिति के आधार पर एफसीएनआर-बी की अतिरिक्त नकदी के इस्तेमाल को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र होंगे।
उन्होंने कहा कि बैंकों की परिसंपत्ति-देनदारी स्थिति यह तय करेगी कि वे अतिरिक्त तरलता का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
जैन ने कहा कि ऋण की मांग व्यापक स्तर पर बनी हुई है और सभी क्षेत्रों तथा खंडों में अच्छी वृद्धि हो रही है। फिलहाल केंद्रीय बैंक को किसी विशेष क्षेत्र में सतर्कता बरतने की जरूरत नहीं दिखती।
उन्होंने कहा, ‘‘बैंक खुद ऋण देने और कर्ज आवेदनों के मूल्यांकन में सावधानी बरत रहे हैं और आरबीआई को उम्मीद है कि ऋण देने के मानक स्वस्थ बने रहेंगे।’’
आरबीआई ने एफसीएनआर-बी जमाओं, विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी (ओएफसीबी) और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए विशेष अमेरिकी डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा आठ जून, 2026 को शुरू की थी।
एफसीएनआर-बी जमाओं के लिए यह योजना 31 अगस्त को बंद कर दी गई। हालांकि, ईसीबी और ओएफसीबी के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर, 2026 तक खुली रहेगी।
आरबीआई के अनुसार, अधिकृत डीलर बैंकों द्वारा 18 सितंबर तक दी गई एफसीएनआर-बी, ईसीबी और ओएफसीबी से संबंधित ताजा जानकारी के मुताबिक कुल धन प्रवाह 143.596 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
एक परिचर्चा में जैन ने कहा कि भारत विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है।
उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन सुरक्षा, नकदी और प्रतिफल तीन प्रमुख बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
डिप्टी गवर्नर ने बताया कि विदेशी मुद्रा भंडार को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, मुद्राओं और परिसंपत्ति वर्गों में विविधीकृत किया गया है तथा इसके प्रबंधन में आंतरिक और बाहरी परिसंपत्ति प्रबंधक शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आरबीआई का उद्देश्य बाहरी आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करना तथा विदेशी निवेशकों और कारोबारी भागीदारों का भरोसा बनाए रखना है।
जैन ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों की प्रतिभूतियों का बाजार अभी खंडित है और द्वितीयक बाजार में तरलता कमजोर है। आरबीआई राज्यों को द्वितीयक बाजार में गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रतिभूतियों को दोबारा जारी करने की संख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
जैन ने कहा कि आरबीआई ‘टोकनाइजेशन’ को लेकर सकारात्मक है और वित्तीय क्षेत्र में इस प्रौद्योगिकी की काफी संभावनाएं देखता है।
उन्होंने कहा कि इससे डिजिटल स्वामित्व रिकॉर्ड, स्वचालित निपटान और परिचालन दक्षता संभव हो सकती है। हालांकि, व्यापक स्तर पर इसे अपनाने से पहले आरबीआई पर्याप्त सुरक्षा उपाय और स्पष्ट नियम चाहता है।
एफसीएनआर-बी योजना के तहत जमा अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में निश्चित अवधि के लिए रखी जाती है और मूलधन तथा ब्याज का भुगतान उसी मुद्रा में किया जाता है। इससे जमाकर्ताओं को रुपये की विनिमय दर में सीधे उतार-चढ़ाव के जोखिम से सुरक्षा मिलती है।
भाषा योगेश अजय
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