दिल्ली उच्च न्यायालय का डीयू के कॉलेजों में छात्रावासों से संबंधित याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय का डीयू के कॉलेजों में छात्रावासों से संबंधित याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय का डीयू के कॉलेजों में छात्रावासों से संबंधित याचिका पर त्वरित सुनवाई से इनकार
Modified Date: September 8, 2026 / 12:34 pm IST
Published Date: September 8, 2026 12:34 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा संचालित सभी कॉलेजों में विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधाओं से संबंधी जनहित याचिका पर त्वरित सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया और सवाल किया कि क्या ‘‘अंतरिम आदेश में’’ ऐसे निर्देश जारी किए जा सकते हैं?

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने वकील से सवाल किया कि वक्त क्यों जाया किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि याचिका को स्वत: सूचीबद्ध के लिए बुधवार को दायर किया जाना चाहिए।

मामले को आज ही सूचीबद्ध किए जाने का उल्लेख किया गया।

वकील ने कहा कि यह जनहित याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास सत्य निकेतन में एक पीजी (पेइंग गेस्ट) आवास के ढहने की घटना की पृष्ठभूमि में दायर की जा रही है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी।

अदालत ने कहा कि छात्रावास सुविधाओं के लिए अंतरिम आदेश में निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। इसने कहा कि वह इसी मुद्दे पर सोमवार को एक अन्य जनहित याचिका पर सुनवाई कर आदेश पारित कर चुकी है।

इस पर वकील ने कहा कि दूसरी जनहित याचिका में मृतक और घायलों के परिजनों के लिए मुआवजे सहित अन्य अनुरोध किए गए थे जो उनकी याचिका से अलग है।

उन्होंने कहा कि उनकी याचिका में विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा प्रदान करने का प्रत्येक कॉलेज को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘क्या हम अंतरिम आदेश में ऐसा निर्देश जारी कर सकते हैं? इसे दायर करें। इस पर कल विचार किया जाएगा।’’

उच्च न्यायालय ने सोमवार को सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना की दिल्ली नगर निगम से उच्चस्तरीय जांच कराने का आदेश दिया था और स्पष्ट किया था कि सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

इस घटना को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी त्रासदियां दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और अन्य प्रशासनों द्वारा किए गए अपर्याप्त उपायों का नतीजा हैं।

उच्च न्यायालय ने उन्हें बचाव प्रयासों को दोगुना करने का निर्देश दिया ताकि लोगों की जान बचाई जा सके।

अदालत ने कहा कि यह घटना न सिर्फ दुखद है, बल्कि इसने दिल्ली विश्वविद्यालय या सरकार द्वारा संचालित छात्रावासों समेत अपर्याप्त आवास सुविधाओं, विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं ऐसे पीजी सुविधाओं के विनियमन के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) या अन्य संबंधित प्रशासन द्वारा पर्याप्त कदम नहीं उठाये जाने को लेकर कई गंभीर चिंताओं को भी जन्म दिया है।

इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी को सोमवार को यहां एक अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनके बेटे को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

भाषा खारी मनीषा

मनीषा


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