नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को अपनी 11 वर्षीय बेटी के साथ बार-बार बलात्कार करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि दोषी ने इस सबसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत 37 वर्षीय व्यक्ति की सजा पर दलीलें सुन रहे थे, जिसे पहले बलात्कार और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की धारा छह के तहत दोषी ठहराया गया था।
विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) आदित्य कुमार ने दलील दी कि दोषी किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है क्योंकि उसने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।
अदालत ने नौ जनवरी को दिये आदेश में कहा, ‘‘एसपीपी ने सही कहा है कि दोषी ने इस सबसे पवित्र रिश्ते को अपने कृत्य से शर्मसार किया है। यह (अपराध) इस तथ्य से और भी गंभीर हो जाता है कि उसने पीड़िता का बार-बार बलात्कार किया।’’
इसने कहा कि दोषी के साथ ‘‘कठोरता’’ बरतनी आवश्यक थी क्योंकि वह पीड़ित का पिता है।
इसके बाद अदालत ने उसे ‘‘उसके शेष जीवनकाल के लिए’’ आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मुआवजे के संबंध में अदालत ने पीड़िता के इस बयान पर ध्यान दिया कि वह अभी भी मानसिक आघात से गुजर रही है।
अदालत ने मुआवजे के लिए उपयुक्त मामला मानते हुए पीड़िता को 10.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश