दिल्ली के महापौर ने एसआईआर आलोचना को लेकर आप और कांग्रेस की निंदा की
दिल्ली के महापौर ने एसआईआर आलोचना को लेकर आप और कांग्रेस की निंदा की
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आलोचना करने पर आम आदमी पार्टी (आप) एवं कांग्रेस की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में चुनाव न जीत पाने के कारण विपक्षी पार्टियां निर्वाचन आयोग की साख पर सवाल उठा रही हैं।
वाही ने उपमहापौर मोनिका पंत के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि विपक्षी पार्टियों ने पहले इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया और अब वे निर्वाचन आयोग को निशाना बनाने के लिए एसआईआर का इस्तेमाल कर रही हैं।
वाही ने कहा, ‘‘जो विपक्षी पार्टियां पिछले 12 सालों से पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम से लेकर विधानसभाओं तक के चुनाव हार रही हैं, वे पहले ईवीएम हैकिंग के बहाने निर्वाचन आयोग की छवि खराब करना चाहती थीं और आज एसआईआर को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती हैं, लेकिन वे कभी कामयाब नहीं होंगी।’’
उन्होंने आप नेता अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बार-बार हमला करने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तो उनकी सरकार ने दिल्ली नगर निगम को फंड नहीं दिया और बाद में 2022 के निकाय चुनाव में आप के सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद इसके संवैधानिक गठन में देरी की।
वाही और पंत ने एक संयुक्त बयान में एसआईआर पर कांग्रेस की आलोचना पर सवाल उठाए और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का ज़िक्र करते हुए पूछा कि क्या पार्टी यह बता सकती है कि क्या लोकतंत्र पर इससे बड़ा कोई हमला हुआ था?
वाही ने पिछली कांग्रेस सरकारों पर पूर्व चुनाव आयुक्तों एस.एल. शकधर और एम.एस. गिल का पक्ष लेने तथा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के साथ अनुचित व्यवहार करने का भी आरोप लगाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कांग्रेस आंदोलनरत है।
इससे पहले ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर में खुलासा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों– सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फ़ैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे।
भाषा
राजकुमार नरेश
नरेश

Facebook


