Delhi Monsoon Arrival Date 2026 : राजधानीवासियों को अभी और करना होगा इंतजार! मॉनसून की चाल पड़ी सुस्त, जुलाई के पहले हफ्ते तक टल सकती है एंट्री
दिल्ली में मॉनसून की एंट्री इस बार सामान्य तारीख से आगे खिसक सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में अनुकूल सिस्टम नहीं बनने और कमजोर मॉनसूनी हवाओं के कारण राजधानी में जुलाई के पहले सप्ताह तक मॉनसून पहुंचने की संभावना है।
Delhi Monsoon Arrival Date 2026 / Image Source ; ai generated
- दिल्ली में मॉनसून जुलाई के पहले सप्ताह तक पहुंच सकता है।
- बंगाल की खाड़ी में जरूरी मौसम प्रणाली नहीं बनने से देरी।
- देश में 4 से 18 जून के बीच 41% कम बारिश दर्ज।
नई दिल्ली : Delhi Monsoon Arrival Date 2026 : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मॉनसूनी बौछारों से सराबोर होने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते तक इंतजार करना पड़ सकता हैं कि क्योंकि अभी अनुकूल परिस्थितियां बनती नजर नहीं आ रही हैं। मौसम विज्ञान विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को यह आशंका जताई।दिल्ली में आमतौर पर 27 जून के आसपास मॉनसून दस्तक देता है।विशेषज्ञों ने मौसम की बेरुखी का जिक्र करते हुए कहा कि 18-19 जून के करीब बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनता है, और फिर पूर्वी हवाएं अरब सागर से नमी वाली हवाओं को दक्षिणी प्रायद्वीप की ओर खींचने में मदद करती हैं।
मॉनसून के आने में देरी की वजह
उन्होंने बताया, ‘‘इसके बाद यह प्रणाली ओडिशा, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से होते हुए उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ती है। इससे घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में घूमने वाला चक्रवाती हवाओं का एक अनुकूल पैटर्न बनता है, जो मॉनसून को देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़ने में मदद करता है।’’निजी मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि मॉनसून के आने में देरी की वजह बंगाल की खाड़ी के ऊपर उस जरूरी मौसमी प्रणाली का न होना है, जो आम तौर पर बारिश लाने वाली हवाओं को उत्तर-पश्चिम भारत की ओर धकेलती है और मॉनसून को 27 जून के आसपास राजधानी तक लाती है।
मॉनसून के बहाव में अरब सागर से आने वाली तेज़ लहर की कमी
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि 25-26 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक अनुकूल प्रणाली बनेगी, जिसके बाद मॉनसून के 27 जून (जो इसके आने की अनुमानित तारीख है) के बजाय जुलाई के पहले हफ्ते में दिल्ली पहुंचने की संभावना है।’’अरब सागर से आने वाली मॉनसून हवाएं भी कमजोर पड़ गई हैं और दो हिस्सों में बंट गई हैं। इनमें से एक हिस्सा दक्षिणी प्रायद्वीप की ओर बढ़ रहा है और दूसरा राजस्थान की ओर अग्रसर है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक कृष्णा मिश्रा ने कहा, ‘‘मौजूदा मॉनसून के बहाव में अरब सागर से आने वाली तेज़ लहर की कमी है।’’
4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी देखी गई
आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक यह देरी ऐसे समय हुई है जब भारत में 4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी देखी गई है और दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दक्षिणी महाराष्ट्र के ऊपर रुका हुआ है।इस दौरान देश में सामान्य 72.2 मिमी के मुकाबले 42.6 मिमी बारिश हुई है।आईएमडी द्वारा जारी बारिश के क्षेत्र-वार आंकड़ों के मुताबिक मध्य भारत में 67 प्रतिशत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 42 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में छह प्रतिशत कम बारिश हुई है।मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को बताया कि पिछले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाने की मुख्य वजह ‘‘वृहद अनुकूल मौसमी स्थितियों का न होना’’ है।
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