सात बांग्लादेशी समेत लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 8 सदस्य गिरफ्तार, देशव्यापी मॉड्यूल का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस
सात बांग्लादेशी समेत लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 8 सदस्य गिरफ्तार, देशव्यापी मॉड्यूल का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने तीन राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकवाद रोधी अभियान के तहत आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मॉड्यूल का पर्दाफाश करके इससे जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें से सात बांग्लादेशी के नागरिक हैं। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि ये सातों बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और जाली पहचान पत्र बनवा लिये थे।
ये गिरफ्तारियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में समन्वित छापेमारी के बाद हुईं। इसके पहले जांचकर्ताओं ने दिल्ली में कई स्थानों पर मारे जा चुके आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीर दर्शाने वाले पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर लगाने में एक समूह की संलिप्तता का पता लगाया था।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) प्रमोद सिंह कुशवाह ने बताया कि इस मॉड्यूल को बांग्लादेश से शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा उर्फ कश्मीरी द्वारा संचालित किया जा रहा था। शब्बीर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रशिक्षित आतंकवादी है।
इसे पहले 2007 में दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ ने हथियारों और गोला-बारूद, जिनमें एके-47 राइफल और ग्रेनेड शामिल थे, की बरामदगी से जुड़े एक मामले में शब्बीर को गिरफ्तार किया था।
उन्होंने बताया कि श्रीनगर के कंगन का रहने वाला शब्बीर वर्ष 2018 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद बांग्लादेश भाग गया था। इसके बाद से शब्बीर अपने आतंकी संगठन से जुड़े और भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी लोगों के ‘स्लीपर सेल’ को सक्रिय करके लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने का काम कर रहा था।
कुशवाह ने कहा,‘‘ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के शिफ्ट प्रभारी द्वारा आठ फरवरी को जनपथ मेट्रो स्टेशन पर चिपकाए गए पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर के संबंध में सुप्रीम कोर्ट मेट्रो पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद जांच शुरू हुई। बाद में दिल्ली में अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के पोस्टर मिले।’’
पोस्टरों में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मारे गए आतंकवादी वानी की तस्वीरें थीं और उन पर ‘भारत नरसंहार बंद करो’ और ‘कश्मीर को आजाद करो’ जैसे संदेशों के साथ-साथ उर्दू में ‘हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है’ और ‘कश्मीरी एकजुटता दिवस’ जैसे नारे भी लिखे गए थे।
प्राथमिकी दर्ज करके विशेष प्रकोष्ठ ने आगे की जांच शुरू की। शुरुआती छानबीन दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट की एक टीम ने की और बाद में जांच विशेष प्रकोष्ठ को सौंप दी गई।
कुशवाह ने बताया कि बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर विशेष प्रकोष्ठ पहले से ही बांग्लादेश से संबंध रखने वाले लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी, इसलिए उसने खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी को और तेज कर दिया।
विश्लेषण के आधार पर, एक टीम ने दो संदिग्धों का पता कोलकाता के हटियारा गोटे स्थित मझरपारा में लगाया। इसके बाद 15 फरवरी को छापेमारी की गई और दो आरोपियों (पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी 31 वर्षीय उमर फारूक और बांग्लादेश के मूल निवासी 31 वर्षीय रोबिउल इस्लाम) को गिरफ्तार किया गया।
अधिकारी ने कहा, ‘‘तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 21 फरवरी को एक साथ छापेमारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप आतंकी संगठन से जुड़े छह और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान मोहम्मद मिजानुर रहमान (32), मोहम्मद सेफायत हुसैन (34), मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम (40), मोहम्मद लिटन (40), मोहम्मद उज्जल (27) और उमर (32) के रूप में हुई है – ये सभी बांग्लादेश के बोगुरा जिले के मूल निवासी हैं।’’
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पूछताछ से पता चला है कि फारुक मार्च 2025 में शब्बीर के संपर्क में आया था और उसने उसे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया था। आरोप है कि लोन ने फारुक को भारत में लश्कर-ए-तैयबा के अभियानों का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया था, जिसमें भारतीय पहचान पत्र हासिल कर चुके बांग्लादेशी नागरिकों का उपयोग किया जाना था।
दिसंबर 2025 में, फारूक को भारत में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी करने और अपने आका को वीडियो भेजने का निर्देश दिया गया था।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया, ‘‘रेकी पूरी करने के बाद, उसे आगे के निर्देशों के लिए और भारत में अवैध रूप से रह रहे और अधिक बांग्लादेशी नागरिकों की भर्ती करने के लिए बांग्लादेश जाने का निर्देश दिया गया था।’’
पुलिस ने बताया कि फारूक ने शब्बीर के निर्देशों के अनुसार कोलकाता में एक ठिकाना किराए पर लिया और उसकी जानकारी शब्बीर के साथ साझा की। यह परिसर आतंकी गतिविधियों के अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया जाना था। शब्बीर ने फारूक को हथियार जुटाने का भी निर्देश दिया, जिसके लिए उसने स्थानीय सूत्रों से संपर्क करना शुरू कर दिया।
छह फरवरी को फारूक और रोबिउल इस्लाम कोलकाता से पटना होते हुए दिल्ली के लिए विमान में सवार हुए। उन्होंने सात फरवरी की रात को दिल्ली में 10 स्थानों पर पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर चिपकाए, इस कृत्य के वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें शब्बीर को भेज दिया। वे आठ फरवरी को ट्रेन से कोलकाता लौट गए।
कुशवाह ने कहा, ‘‘शब्बीर ने उन्हें बधाई दी और कोलकाता में भी ऐसा ही करने का निर्देश दिया। बाद में दोनों ने पश्चिम बंगाल की राजधानी में कई जगहों पर इसी तरह के पोस्टर चिपकाए और शब्बीर के साथ वीडियो साझा किए। शब्बीर का एक और साथी सैदुल इस्लाम था, जो बांग्लादेशी नागरिक है और फिलहाल विदेश में रह रहा है। सैदुल इस्लाम ने शब्बीर को बांग्लादेश में अवैध रूप से प्रवेश करने में मदद की और वहां उसके छिपने का इंतजाम किया। सैदुल इस्लाम ने शब्बीर और फारूक को तमिलनाडु स्थित गिरोह के बारे में भी जानकारी दी।’’
तलाशी के दौरान, पुलिस ने आरोपियों के किराए के आवास से पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर जब्त किए, साथ ही आपत्तिजनक सामग्री वाले 10 मोबाइल फोन भी बरामद किए। उन्होंने 25 क्रेडिट और डेबिट कार्ड, पांच प्वाइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनें और बांग्लादेशी पासपोर्ट और पहचान पत्र भी जब्त किए।
अधिकारी वित्तीय लेनदेन और संभावित हवाला संबंधों की जांच कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने अपनी बांग्लादेशी पहचान छिपाने के लिए भारतीय पहचान पत्र प्राप्त किए थे और अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था।
कुशवाह ने बताया कि श्रीनगर निवासी शब्बीर को विशेष प्रकोष्ठ ने 2007 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के समय उसके जमात-उद-दावा (जेयूडी) प्रमुख हाफिज सईद और उसके डिप्टी जकी-उर-रहमान लखवी से सीधे संबंध पाए गए थे। उसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फरबाद में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के एक शिविर में बुनियादी (दौरा-ए-आम) और उन्नत (दौरा-ए-खास) आतंकी प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
पुलिस ने बताया कि लोन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) का समर्थन और वित्तीय सहायता प्राप्त थी, जिसका इस्तेमाल भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकी साजिशों में शामिल करने के लिए किया जाता था।
वर्ष 2007 के मामले के अलावा, शब्बीर पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भी कार्यवाही चल रही है और वर्ष 2011 में दिल्ली के हरि नगर पुलिस थाने में दर्ज एक अन्य आपराधिक मामले में भी उसका नाम है।
पुलिस ने कहा कि समय पर हुई गिरफ्तारियों से भारत में आतंकी हमलों के संभावित खतरे को टालने में सफलता मिली है। इस मॉड्यूल ने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी की थी और हथियारों की व्यवस्था करने की प्रक्रिया में था।
गिरफ्तार आरोपियों के अन्य सहयोगियों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।
भाषा संतोष प्रशांत
प्रशांत

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