नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर और देश के कई हिस्सों में सक्रिय एक साइबर अपराध गिरोह से कथित तौर पर जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है और लगभग 15 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता लगाया है। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा, “इस गिरोह को चीन स्थित संचालकों द्वारा सोशल मीडिया चैनलों के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा था, जहां बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की जाती थी और ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) उपयोगकर्ता को प्राप्त न हो इसके लिए हानिकारक एपीके फाइलों का इस्तेमाल किया जाता था।”
उन्होंने बताया कि आरोपी कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम के अंतरण के लिए ‘म्यूल’ बैंक खातों का उपयोग करते हुए एक बहु-स्तरीय नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
‘म्यूल’ खाते वे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी, चोरी किए गए या अवैध धन (जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, मानव तस्करी से मिले पैसे) को छिपाने और एक जगह से दूसरी जगह अंतरित करने के लिए करते हैं, ताकि पैसे के असली स्रोत का पता न चले।
अधिकारी के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 4.70 लाख रुपये नकद, 14 मोबाइल फोन, 20 सिम कार्ड और सात डेबिट कार्ड बरामद किए।
उन्होंने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब तमिलनाडु की एक महिला ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराई।
महिला ने बताया कि पिछले साल सितंबर में उसके बैंक खाते से धोखाधड़ी कर 6,000 रुपये निकाल लिए गए थे।
पुलिस के अनुसार, पूर्वी दिल्ली की एक निजी बैंक शाखा में स्थित लाभार्थी खाते की जांच से पता चला कि यह गाजियाबाद निवासी द्वारा संचालित एक ‘म्यूल’ खाता था।
पुलिस ने बताया कि जांच के बाद पांडव नगर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा हैं, जिनके विभिन्न बैंकों में कम से कम 85 ‘म्यूल’ बैंक खाते हैं और इन खातों से संबंधित अब तक 600 से अधिक एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
पुलिस ने बताया कि एक टीम ने बैंक से जुड़े दस्तावेजों, इंटरनेट बैंकिंग लॉग और आईपी एड्रेस का विश्लेषण किया और इस तकनीकी जांच के आधार पर आठ आरोपियों को दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, रामपुर और महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर ‘म्यूल’ खातों की व्यवस्था की और साइबर ठगी से हासिल रकम निकाली और बाद में उस रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया।
पुलिस ने कहा कि पीड़ितों की पहचान, धन के लेनदेन और विदेशी संचालकों का पता लगाने के लिए मामले की जांच जारी है।
भाषा प्रचेता प्रशांत
प्रशांत