नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर स्थिति ‘‘स्थिर है, लेकिन निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।’’ उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में किसी भी ‘‘दुस्साहस’’ के खिलाफ पाकिस्तान को सख्त चेतावनी भी दी।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवाद के खिलाफ सीमा पार भारत की ‘‘कड़ी’’ प्रतिक्रिया ने रणनीतिक स्पष्टता प्रदान की और उनकी सेना ने पाकिस्तान के साथ शत्रुता के बाद जमीनी हमलों की तैयारियों के तहत अग्रिम लामबंदी की थी।
सेना दिवस से पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिकों को मई के अंत तक वापस बुला लिया गया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘‘हमारी आंखें और कान खुले हैं’’ और दुश्मन के ‘‘किसी भी दुस्साहस’ से प्रभावी ढंग से निपटा जाएगा।
सेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ‘दो अहम मोड़’ का भी जिक्र किया – उनमें से एक 7 मई की सुबह आतंकी ठिकानों पर 22 मिनट का हमला था, जबकि दूसरा 10 मई को भारतीय सेना को दिए गए ‘कुछ निर्देश’ थे कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्या करना है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार कम से कम छह आतंकी शिविर और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार दो आतंकी शिविर सक्रिय हैं, और अगर कोई भी नापाक गतिविधि अंजाम दी जाती है तो भारत कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि इन शिविरों में 100 से 150 आतंकवादी मौजूद हैं।
सेना प्रमुख ने सेना की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए उठाए गए कई कदमों की भी सूची दी, जिनमें भैरव लाइट कमांडो बटालियन, शक्तिबान रेजिमेंट, दिव्यास्त्र तोपखाना रेजिमेंट और अश्विनी प्लाटून जैसी नयी इकाइयों का गठन शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एकीकृत युद्ध समूहों (आईबीजी) की स्थापना के काफी समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें पैदल सेना, तोपखाना, वायु रक्षा, टैंक और रसद इकाइयों का समावेश होगा।
चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति के बारे में जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह ‘‘स्थिर बनी हुई है लेकिन निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है।’
उन्होंने कहा, ‘उच्च स्तरीय वार्ता, पुनः संपर्क और विश्वास-निर्माण के उपाय स्थिति को धीरे-धीरे सामान्य करने में योगदान दे रहे हैं। इससे उत्तरी सीमाओं पर पशुचारण और अन्य गतिविधियां भी संभव हो पाई हैं।’
उन्होंने कहा, ‘‘इस मोर्चे पर हमारी निरंतर रणनीतिक दिशा के साथ, एलएसी पर हमारी तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है। साथ ही, समग्र सरकारी दृष्टिकोण के माध्यम से क्षमता विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में प्रगति हो रही है।’’
जनरल द्विवेदी ने यह भी संकेत दिया कि एलएसी को स्थिर रखने के व्यापक लक्ष्यों के तहत भारत और चीन ने “सैनिकों का समायोजन” किया है।
सेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारत की है।
पाकिस्तान ने 1963 में अवैध रूप से कब्ज़ा किए गए शक्सगाम घाटी के 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था।
जनरल द्विवेदी ने कहा, ‘जहां तक शक्सगाम घाटी का सवाल है, भारत पाकिस्तान और चीन के बीच हुए 1963 के समझौते को अवैध मानता है।’
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति ‘संवेदनशील बनी हुई है लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण में है।’
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