विधवा पुत्रवधू अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने की हकदार: उच्चतम न्यायालय

विधवा पुत्रवधू अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण पाने की हकदार: उच्चतम न्यायालय

  •  
  • Publish Date - January 13, 2026 / 10:43 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 10:43 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि हिंदू कानून के तहत यदि कोई महिला अपने ससुर की मृत्यु के बाद विधवा हो जाती है, तो वह उसकी संपत्ति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और एसवीएन भट्टी की पीठ ने फैसला सुनाया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम (एचएएमए) 1956 के तहत महिला को ‘आश्रित’ का दर्जा देने के लिए पति की मृत्यु का समय (चाहे वह ससुर की मृत्यु से पहले हो या बाद में) ‘अप्रासंगिक’ है।

फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्ति मिथल ने निष्कर्षों को सरल शब्दों में बताते हुए कहा, ‘मृत हिंदू के सभी उत्तराधिकारी उसकी संपत्ति से प्राप्त धन/संपत्ति से उसके आश्रितों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं।’

न्यायालय ने कहा, ‘हमारा स्पष्ट मत है कि मृत हिंदू व्यक्ति के ‘पुत्र की कोई विधवा’ अधिनियम की धारा 21 (सात) के अर्थ में आश्रित है और अधिनियम की धारा 22 के तहत भरण-पोषण का दावा करने की हकदार है।’

इसमें कहा गया है कि पुत्र या कानूनी वारिस विरासत में मिली संपत्ति में से सभी आश्रित व्यक्तियों का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य हैं; अर्थात, वे सभी व्यक्ति जिनका भरण-पोषण करने के लिए मृत व्यक्ति कानूनी और नैतिक रूप से बाध्य था।

पीठ ने कहा, ‘‘अत: पुत्र की मृत्यु के बाद अगर विधवा पुत्रवधू स्वयं या मृतक पुत्र द्वारा छोड़ी गई संपत्ति के माध्यम से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो तो ससुर का यह कर्तव्य है कि वह उसका भरण-पोषण करे।

इसमें कहा गया है, ‘इस अधिनियम में ससुर के अपनी विधवा पुत्रवधू के भरण-पोषण के उपरोक्त दायित्व को समाप्त करने का प्रावधान नहीं है, चाहे वह ससुर की मृत्यु से पहले या बाद में विधवा हुई हो।’

यह मामला दिवंगत महेंद्र प्रसाद की संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद से उत्पन्न हुआ है। प्रसाद का दिसंबर 2021 में निधन हो गया था।

उनके बेटों में से एक रणजीत शर्मा का मार्च 2023 में निधन हो गया। रणजीत की मृत्यु के बाद उनकी विधवा, गीता शर्मा ने परिवार न्यायालय में अपने ससुर की संपत्ति से भरण-पोषण के लिए अर्जी दी।

परिवार न्यायालय ने शुरू में उसकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने ससुर की मृत्यु की तारीख पर विधवा नहीं थी और इसलिए आश्रित के रूप में योग्य नहीं थी।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने उच्चतम न्यायालय में अपील की।

भाषा

शुभम दिलीप

दिलीप