दिल्ली पुलिस ने अवैध दवा व्यापार में शामिल अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया; चार गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने अवैध दवा व्यापार में शामिल अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया; चार गिरफ्तार
नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने नकली दवा बनाने, सरकारी आपूर्ति की दवाओं पर नए लेबल लगाने तथा उन्हें वितरित करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक अवैध इकाई का भी पता चला है, जहां दवाइयों की प्रोसेसिंग और दोबारा पैकिंग की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी गई दवाइयों हासिल करता था। इसके बाद उन दवाइयों के असली लेबल और पहचान के निशान हटाकर उन्हें नए पैकेट में पैक करता था और फिर दिल्ली-एनसीआर तथा पूर्वोत्तर राज्यों में गैरकानूनी तरीके से बेचता था।
गिरफ्तार किए गए लोगों में मुखर्जी नगर का निवासी कथित सरगना मनोज कुमार जैन (56), पंचकूला (हरियाणा) निवासी राजू कुमार मिश्रा (57); प्रयागराज निवासी विक्रम सिंह उर्फ सन्नी (32) और वतन (35) शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह द्वारा रेबीज टीका, स्नेक वेनम एंटीसीरम (सांप के जहर की काट), इंसुलिन, ह्यूमन एल्ब्यूमिन और हेपेटाइटिस-बी टीका सहित कई जीवन रक्षक दवाओं की नकली खेप वितरित की जा रही थीं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) पंकज कुमार ने एक बयान में कहा कि पुलिस को विशिष्ट जानकारी मिली कि एक संगठित गिरोह सरकारी अस्पतालों को आपूर्ति की जाने वाली दवाओं को इकट्ठा कर रहा है, उनकी मूल पैकेजिंग हटा रहा है और दिल्ली-एनसीआर तथा पूर्वोत्तर राज्यों में व्यावसायिक बिक्री के लिए उन पर नए लेबल लगा रहा है।
सूचना पर कार्रवाई करते हुए, टीम ने दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग के साथ समन्वय किया और मुखर्जी नगर के इंदिरा विकास कॉलोनी स्थित एक परिसर में छापेमारी की। औषधि नियंत्रण विभाग और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएसओ) के औषधि निरीक्षकों ने भी इस छापेमारी में भाग लिया।
अधिकारी ने कहा, ‘तलाशी के दौरान, टीम ने परिसर से मनोज कुमार जैन को पकड़ा और भारी मात्रा में ब्रांडेड दवाएं, सरकारी आपूर्ति की दवाएं, संदिग्ध नकली दवाएं, पैकेजिंग और लेबलिंग सामग्री तथा अवैध निर्माण और री-लेबलिंग में कथित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली मशीनरी बरामद की।’
पुलिस ने कहा कि बरामदगी से नकली दवाओं के बड़े पैमाने पर अवैध उत्पादन और संचालन में लगे एक सुनियोजित नेटवर्क का संकेत मिला है। 23 अप्रैल को अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि टीम ने छापेमारी के दौरान हजारों गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन और शीशियां जब्त कीं।
उनके मुताबिक, बरामदगी में हेपबेस्ट (हेपेटाइटिस की दवा) की 7,900 गोलियां, एजीथ्रोमाइसिन (एंटीबायोटिक) की 6,000 गोलियां, लेनवाकास्ट के 7,800 और लेनवाटोल (कैंसर की दवाएं) के 6,300 कैप्सूल, रेबीज टीके की 953 शीशियां, ज़ेरोडोल-एसपी (दर्द निवारक) की 18,000 गोलियां, यूडिडैक (लीवर की दवा) की 9,000 गोलियां और विटामिन डी3 के 1,500 इंजेक्शन शामिल थे।
पुलिस ने 55 ‘स्नेक वेनम एंटीसीरम इंजेक्शन’ , 260 ‘एंटी-डी इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन’, 315 ‘इंसुलिन’ के इंजेक्शन , हेपेटाइटिस-बी टीके की 2,500 खुराक और सेफिक्सिम (एंटीबायोटिक) की 20,000 से अधिक गोलियों के अलावा खुली गोलियां, पैकेजिंग सामग्री और चार लेबलिंग एवं पैकेजिंग मशीनें भी बरामद कीं।
पुलिस ने बताया कि बरामद दवाओं का कुल बाजार मूल्य करीब 6 करोड़ रुपये आंका गया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, मनोज कुमार जैन इस गिरोह का मास्टरमाइंड है।
पूछताछ के दौरान, जैन ने पुलिस को बताया कि वह पहले मणिपुर में भवन निर्माण व्यवसाय में काम करता था, लेकिन नुकसान होने के बाद 2024 में अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गया। बाद में उसने करीब डेढ़ साल पहले राजू कुमार मिश्रा के साथ साझेदारी में मुखर्जी नगर स्थित अपने परिसर से नकली दवा बनाने का काम शुरू किया।
पुलिस ने कहा कि जैन ने सरकारी आपूर्ति वाली दवाएं खरीदने, उनके लेबल बदलने और उन्हें खुले बाजार में बेचने की बात स्वीकार की। उसने कथित तौर पर खुलासा किया कि दवाओं को दिल्ली, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों सहित अन्य स्थानों पर वितरित किया गया था।
पुलिस ने बताया कि 12वीं कक्षा तक पढ़ा राजू कुमार मिश्रा पहले अपने भाई के क्लिनिक में सहायता करता था जहां वह दवा के रखरखाव व आपूर्ति के काम से परिचित हुआ।
पुलिस ने कहा कि मिश्रा ने पंजाब के डेराबस्सी इलाके में नकली ‘ह्यूमन एल्ब्यूमिन’ बनाने वाली एक इकाई स्थापित की और बाद में पूर्वोत्तर राज्यों में दवाओं के वितरण के लिए जैन के साथ साझेदारी की।
अधिकारी ने कहा, ‘प्रारंभिक जांच में अवैध व्यापार के माध्यम से उत्पन्न धन के हस्तांतरण के लिए संदिग्ध हवाला माध्यमों के उपयोग का भी पता चला है।’ उन्होंने कहा कि विस्तृत वित्तीय जांच भी जारी है।
भाषा नोमान नोमान रंजन
रंजन
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