नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को संसद मार्ग पुलिस थाने के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आदेश देने से इनकार कर दिया। इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से बल प्रयोग करने वाले कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायत की पावती नहीं उपलब्ध कराई थी।
वकील अभिजीत आनंद ने न्यायमूर्ति प्रतीक जालान को बताया कि ‘आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट’ ने 22 जुलाई को पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार, संयुक्त आयुक्त मधुर वर्मा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त संदीप लांबा और दिल्ली पुलिस एवं ‘रैपिड एक्शन फोर्स’ के अन्य कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें संज्ञेय अपराध होने की बात कही गई थी।
आनंद ने कहा कि काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद पुलिस थाने के प्रभारी ने शिकायत मिलने की पावती नहीं उपलब्ध कराई, जो कानून के खिलाफ था।
दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया कि 22 जुलाई को कंप्यूटर सिस्टम में कुछ समय के लिए तकनीकी खराबी आ गई थी और डीडी नंबर के साथ पावती तैयार करके दिन में ही बाद में याचिकाकर्ता को दे दी जाएगी।
पुलिस का पक्ष सुनने के बाद जब अदालत ने याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी, तो याचिकाकर्ता के वकील ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया।
इस अनुरोध को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘क्या आप मामले पर आगे बढ़ना चाहते हैं या अधिकारी के पीछे पड़ना चाहते हैं? आप मामले पर ध्यान दें। आपके अनुसार, आपका मकसद लोगों को न्याय दिलाना है।’’
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जब वे अपनी शिकायत लेकर संसद मार्ग पुलिस थाना गए, तो अधिकारी ने कानून के मुताबिक रसीद देने और प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया।
भाषा संतोष सुरेश
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