दिल्ली : विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी को जमानत

दिल्ली : विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी को जमानत

दिल्ली : विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने के आरोपी सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी को जमानत
Modified Date: February 19, 2026 / 05:39 pm IST
Published Date: February 19, 2026 5:39 pm IST

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने विवाह क झूठा वादा कर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी को नियमित जमानत दे दी है।

अदालत ने कहा कि आरोपी की “गिरफ्तारी के आधार” उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थे।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार खर्ता ने आरोपी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि को दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) (एक ही महिला से बार-बार दुष्कर्म) के तहत मामला दर्ज है।

अदालत ने कहा कि यद्यपि जांच अधिकारी ने आरोपी को “गिरफ्तारी के आधार” शीर्षक से एक लिखित दस्तावेज उपलब्ध कराया, लेकिन उसकी सामग्री “गिरफ्तारी के कारणों” जैसी थी, न कि कानून के तहत अपेक्षित विशिष्ट आधारों जैसी।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि दोनों अभिव्यक्तियों में “उल्लेखनीय अंतर” है।

अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा, “यह दोहराया जा सकता है कि ‘गिरफ्तारी के कारण’ और ‘गिरफ्तारी के आधार’ में महत्वपूर्ण अंतर है। ‘गिरफ्तारी के कारण’ सामान्य प्रकृति के होते हैं, जबकि ‘गिरफ्तारी के आधार’ में जांच अधिकारी के पास उपलब्ध वे सभी विशिष्ट तथ्य होने चाहिए, जो आरोपी की गिरफ्तारी को आवश्यक बनाते हैं। ”

अदालत ने पाया कि वर्तमान मामले में जांच अधिकारी ने आरोपी को मामले के मूल तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं दी और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि गिरफ्तारी क्यों आवश्यक थी। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जो जमानत के पक्ष में एक आधार है।

यह आदेश 17 फरवरी को पारित किया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच लगभग 10 वर्षों तक संबंध थे और आरोपी ने विवाह का झूठा वादा कर कई बार शिकायतकर्ता से शारीरिक संबंध बनाए। अभियोजन ने व्हाट्सऐप चैट और आरोपी की शादी से कुछ समय पहले महिला द्वारा कथित रूप से किए गए ऑनलाइन धन हस्तांतरण के स्क्रीनशॉट पर भी भरोसा किया।

अदालत में उपस्थित पीड़िता ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी ने विवाह का झांसा देकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए और उससे अपनी शादी छिपाई।

अदालत ने कहा कि उपलब्ध चैट से दोनों के बीच “किसी प्रकार के संबंध” और आरोपी की मां के इलाज के लिए धन हस्तांतरण का संकेत मिलता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि शारीरिक संबंध केवल विवाह के बहाने ही बनाए गए। अदालत के अनुसार, यह मुद्दा विचार का विषय है।

शिकायतकर्ता के भाई को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फोन कर दबाव बनाने के आरोप पर अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे धमकी दिए जाने का संकेत मिले।

अदालत ने यह भी पाया कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और आरोपी से आगे किसी हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि दोनों अलग-अलग शहरों में रहते हैं, इसलिए आरोपी द्वारा पीड़िता को प्रभावित करने की संभावना भी कम है।

अदालत ने कहा कि मुकदमे में लंबा समय लगेगा और आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। जमानत की शर्तों के तहत आरोपी को गवाहों से संपर्क न करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने, शिकायतकर्ता को धमकी न देने और उसके आसपास न जाने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य और पीड़िता जमानत निरस्त कराने की मांग के लिए स्वतंत्र होंगे।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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